चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक काम कर लेने से किसी कर्मचारी को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग (PSERC) में दोबारा नौकरी करने वाले एक पूर्व सैन्य अधिकारी की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की मांग खारिज कर दी। न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि पेंशन का हक नियुक्ति की प्रकृति और लागू नियमों पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ सेवा अवधि पर।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं, जिन्होंने 1997 में सेना से रिटायर होने के बाद 2002 में PSERC में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर काम शुरू किया। उनकी नियुक्ति पहले एक साल के लिए हुई थी और बाद में समय-समय पर बढ़ाई जाती रही। 2014 के बाद उन्हें कॉन्ट्रैक्ट आधार पर रखा गया।
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उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने आयोग में करीब 12 साल तक लगातार काम किया और इसलिए वे पेंशन, पूरी ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट के हकदार हैं। उनका तर्क था कि पंजाब सिविल सर्विस रूल्स के तहत 10 साल से ज्यादा सेवा करने पर पेंशन मिलनी चाहिए। लेकिन आयोग ने 2016 में उनका दावा खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने नियमित और स्वीकृत पद पर काम किया, इसलिए उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ मिलने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें पहले कुछ ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट दिया गया था, लेकिन पूरी रकम और पेंशन नहीं मिली।
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वहीं, आयोग की ओर से कहा गया कि संस्था में कभी भी स्थायी पद बनाए ही नहीं गए। सभी नियुक्तियां या तो प्रतिनियुक्ति, पुनर्नियुक्ति या कॉन्ट्रैक्ट पर होती रही हैं। याचिकाकर्ता की नियुक्ति भी शुरू से अस्थायी थी और उनके नियुक्ति पत्र में साफ लिखा था कि उनकी सेवा कभी भी खत्म की जा सकती है। आयोग ने यह भी कहा कि जिन नियमों के तहत उनकी सेवा चल रही थी, उनमें पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है।
कोर्ट की टिप्पणियां
अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि, “पेंशन कोई इनाम नहीं है, लेकिन यह तभी मिलती है जब कर्मचारी लागू नियमों की सभी शर्तें पूरी करता हो।” बेंच ने यह भी जोड़ा कि सिर्फ लंबे समय तक काम करने से पेंशन का अधिकार अपने आप नहीं बन जाता।
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता के नियुक्ति पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उनकी नौकरी शुरू से ही अस्थायी थी और इसे कभी स्थायी या नियमित पद में बदला नहीं गया। जज ने यह भी नोट किया कि आयोग के नियमों में पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है और सरकार की तरफ से भी साफ कर दिया गया था कि ऐसे कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलेगी।
फैसला
सभी दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग ने कभी भी नियमित पद बनाने का इरादा नहीं रखा था और याचिकाकर्ता की नियुक्ति अस्थायी व कॉन्ट्रैक्ट आधार पर ही रही। इसलिए वे पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के हकदार नहीं हैं।
अदालत ने याचिका खारिज करते हुए आयोग के फैसले को सही ठहराया।
Case Title:- Lt. Col. Ashok Bembey vs Punjab State Electricity Regulatory Commission & Another
Read Number:- CWP-16174-2017 (O&M)
Pronounced Date:- 2 February 2026










