मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सजा निलंबन के बाद आरोपी को हर तारीख पर बुलाना अनुचित, हरियाणा अदालतों को निर्देश

मीनाक्षी बनाम हरियाणा राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा निलंबन के बाद आरोपी को हर तारीख पर बुलाना गलत है। हरियाणा अदालतों को निर्देश जारी।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सजा निलंबन के बाद आरोपी को हर तारीख पर बुलाना अनुचित, हरियाणा अदालतों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि जब किसी आरोपी की सजा निलंबित कर दी गई हो और उसे जमानत मिल चुकी हो, तो अपीलीय अदालत द्वारा हर तारीख पर उसकी व्यक्तिगत मौजूदगी की शर्त लगाना उचित नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मीनाक्षी बनाम हरियाणा राज्य मामले में की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चेक बाउंस से जुड़े एक आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत से सजा मिलने के बाद उन्होंने अपील दायर की थी, जिसमें सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी।

Read also:- RTE प्रवेश पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्री-प्राइमरी और कक्षा 1 दोनों स्तरों पर 25% सीटें अनिवार्य

हालांकि, अपीलीय अदालत में सुनवाई के दौरान उनकी उपस्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कई बार वकील बदलने और एक तारीख पर अनुपस्थिति के कारण अदालत ने जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। बाद में आरोपी ने आत्मसमर्पण किया, लेकिन फिर भी राहत नहीं मिली।

इसके बाद मीनाक्षी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, जहां मामला लंबित रहा। अंततः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि-

“जब किसी आरोपी की सजा निलंबित हो चुकी हो और उसे जमानत मिल चुकी हो, तब हर तारीख पर उसकी उपस्थिति अनिवार्य करना न केवल अनावश्यक है बल्कि अनुचित भी है।”

पीठ ने यह भी कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान आरोपी को बार-बार अदालत बुलाना उसे अनावश्यक रूप से परेशान करने जैसा है।

Read also:- डिप्लोमा अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार फार्मासिस्ट भर्ती नियमों को सही ठहराया, याचिकाएं खारिज

कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अपीलीय अदालत ने या तो वकील की अनुपस्थिति में अमीकस क्यूरी नियुक्त नहीं किया या फिर वैकल्पिक व्यवस्था का अवसर नहीं दिया।

कोर्ट का स्पष्ट रुख

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि-

  • जब सजा निलंबित हो चुकी हो, तो आरोपी की नियमित उपस्थिति जरूरी नहीं
  • अपील लंबित रहने का यह मतलब नहीं कि आरोपी को हर तारीख पर बुलाया जाए
  • यदि अपील खारिज होती है, तो कानून के अनुसार बाद में कार्रवाई की जा सकती है
  • अदालतों को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए

पीठ ने यह भी माना कि वर्षों तक अपील लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसका खामियाजा आरोपी को नहीं भुगतना चाहिए।

Read also:- किरायेदार को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा-समन के बिना खारिज नहीं हो सकती 'लीव टू डिफेंड' अर्जी

अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने अपील का निपटारा करते हुए आदेश दिया कि-

  • याचिकाकर्ता को दी गई जमानत अपील के अंतिम निपटारे तक जारी रहेगी
  • अपीलीय अदालत को तीन महीने के भीतर मामला निपटाने का प्रयास करना चाहिए
  • हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह आदेश जिला अदालतों तक प्रसारित करने को कहा गया है

इस तरह अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि सजा निलंबन के बाद अनावश्यक पेशी से आरोपी को राहत मिलनी चाहिए।

Case Title: Meenakshi vs State of Haryana

Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 19050/2025

Decision Date: 7 January 2026

More Stories