दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के एक मामले में चल रही विभागीय जांच को रोकने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि जब तक जांच पूरी होकर अंतिम आदेश नहीं आ जाता, तब तक कोर्ट का दखल देना जल्दबाज़ी होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीआरपीएफ अधिकारी सापन सुमन की याचिका खारिज करते हुए कहा कि शो-कॉज नोटिस के चरण में अदालतें आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करतीं।
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यह मामला वर्ष 2015 का है, जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी अधिकारी पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने कानून के अनुसार एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया।
समिति ने कई वर्षों तक सुनवाई की और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया। अंत में नवंबर 2021 में समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें आरोपों को सही पाया गया।
इसके आधार पर विभाग ने फरवरी 2022 में अधिकारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया, यानी यह पूछा गया कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
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अधिकारी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि:
- जांच समिति का गठन सही तरीके से नहीं हुआ
- उसे औपचारिक रूप से आरोप पत्र नहीं दिया गया
- जांच में सेवा नियमों और 2015 के सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हुआ
- जब वरिष्ठ अधिकारी को माफी के आधार पर छोड़ दिया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई जारी रखना गलत है
वहीं केंद्र सरकार और विभाग की ओर से कहा गया कि जांच उस समय लागू कानूनों के अनुसार की गई और अधिकारी को पूरा मौका दिया गया
जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने कहा कि:
“शो-कॉज नोटिस अपने-आप में कोई सजा नहीं है। यह केवल जवाब देने का अवसर होता है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- अधिकारी को शिकायत और आरोपों की पूरी जानकारी थी
- उसने जांच में हिस्सा लिया और बचाव का मौका भी मिला
- सिर्फ प्रक्रिया में मामूली कमी के आधार पर पूरी जांच रद्द नहीं की जा सकती
- यौन उत्पीड़न के मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए
कोर्ट ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि 2015 में जारी सरकारी कार्यालय ज्ञापन (OM) को पहले से चल रही जांच पर लागू किया जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे निर्देश आमतौर पर भविष्य में लागू होते हैं, न कि पीछे से।
इन सभी कारणों के आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
Case Title: Sapan Suman v. Union of India & Ors.
Case Number: W.P.(C) 4181/2022
Court: Delhi High Court
Bench: Justice Anil Kshetarpal & Justice Amit Mahajan










