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दिल्ली HC ने स्कूल यूनिफॉर्म पर बड़ा फैसला दिया, DBT से राशि देने की नीति को दी मंजूरी

जस्टिस फॉर ऑल बनाम दिल्ली सरकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने EWS छात्रों को यूनिफॉर्म देने पर बड़ा फैसला सुनाया। DBT से राशि देने की नीति को वैध ठहराया।

Vivek G.
दिल्ली HC ने स्कूल यूनिफॉर्म पर बड़ा फैसला दिया, DBT से राशि देने की नीति को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित श्रेणी (DG) के छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म देने से जुड़े लंबे विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार द्वारा यूनिफॉर्म “नकद सहायता (DBT)” के जरिए देने की नीति कानून के खिलाफ नहीं है और इसे लागू किया जा सकता है। यह फैसला 23 जनवरी 2026 को सुनाया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2013 में दाखिल एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली सरकार पर आरोप था कि वह आरटीई एक्ट के तहत EWS और DG छात्रों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करा रही है।

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2014 में कोर्ट ने पाया था कि हजारों बच्चों को न तो किताबें मिलीं और न ही यूनिफॉर्म। इसके बाद कई निर्देश जारी हुए।

हालांकि, 2023 में सरकार ने कहा कि यूनिफॉर्म “इन-काइंड” देने के बजाय सीधे बैंक खाते में राशि (DBT) देना व्यावहारिक होगा।

सरकार की दलील

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि-

  • हर स्कूल की यूनिफॉर्म अलग होती है
  • बच्चों के नाप लेने और सिलाई की प्रक्रिया बेहद जटिल है
  • GeM पोर्टल से खरीद में महीनों लग जाते हैं
  • इससे समय पर यूनिफॉर्म देना संभव नहीं हो पाता

सरकार ने यह भी बताया कि कैबिनेट ने 10 जून 2025 को नई नीति को मंजूरी दी, जिसके तहत ₹1250 से ₹1700 तक की राशि सीधे छात्रों को दी जाएगी।

कोर्ट का अवलोकन

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा-

“सरकार के सामने व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं। यूनिफॉर्म को सीधे नकद सहायता के जरिए देना न तो मनमाना है और न ही कानून के खिलाफ।”

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि
आरटीई कानून यह नहीं कहता कि यूनिफॉर्म केवल वस्तु के रूप में ही दी जाए। उद्देश्य यह है कि छात्र को सुविधा मिले - तरीका सरकार तय कर सकती है।

कोर्ट का निर्णय

  • दिल्ली सरकार की 10 जून 2025 की नीति वैध करार
  • 13 अप्रैल 2023 के पुराने आदेश में संशोधन
  • यूनिफॉर्म अब DBT के जरिए दी जा सकेगी
  • नीति को मनमाना या असंवैधानिक नहीं माना गया
  • रिव्यू पिटीशन निपटाई गई

“नीति निर्धारण में अदालत दखल नहीं दे सकती जब तक वह मनमानी या असंवैधानिक न हो,” अदालत ने कहा।

Case Title: Justice For All vs Govt. of NCT of Delhi

Case No.: W.P.(C) 3684/2013 | Review Pet. 475/2025

Court: Delhi High Court

Decision Date: 23 January 2026

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