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वेटिंग लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: RPSC मामले में हाईकोर्ट के आदेश रद्द, नियुक्ति निर्देश अवैध

राजस्थान लोक सेवा आयोग बनाम यति जैन और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने RPSC वेटिंग लिस्ट मामलों में हाईकोर्ट के आदेश रद्द किए। कोर्ट बोला-वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं।

Vivek G.
वेटिंग लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: RPSC मामले में हाईकोर्ट के आदेश रद्द, नियुक्ति निर्देश अवैध

नई दिल्ली में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़े तीन अहम मामलों में साफ कहा कि वेटिंग/रिज़र्व लिस्ट से सीधे नियुक्ति का कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं बनता। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उन आदेशों को पलट दिया, जिनमें वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए थे।

मामले की पृष्ठभूमि

ये तीनों अपीलें RPSC द्वारा जूनियर लीगल ऑफिसर और असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर जैसी भर्तियों से जुड़ी थीं। अलग-अलग भर्ती चक्रों में कुछ चयनित उम्मीदवारों ने नौकरी जॉइन नहीं की। इसके बाद वेटिंग लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उन्हें राहत देते हुए नियुक्ति या नियुक्ति पर विचार का निर्देश दिया, जिसे डिविजन बेंच ने भी बरकरार रखा। इसी के खिलाफ RPSC सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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कोर्ट के सामने सवाल

सुनवाई के दौरान तीन बड़े मुद्दे उभरे-

  1. क्या राज्य सरकार के अपील न करने पर भी RPSC अपील कर सकता है?
  2. वेटिंग लिस्ट का कानूनी दर्जा क्या है और उसका अधिकार कितना है?
  3. बिना सरकार की औपचारिक मांग (रिक्विज़िशन) के कोर्ट नियुक्ति का आदेश दे सकता है या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोक सेवा आयोग केवल सिफारिश करने वाला निकाय नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था है, और उसके अधिकारों को दरकिनार कर दिए गए आदेश उसे सीधे प्रभावित करते हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया,

“वेटिंग लिस्ट भर्ती का स्वतंत्र स्रोत नहीं है। यह केवल उसी भर्ती प्रक्रिया में उत्पन्न आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए सीमित अवधि तक काम करती है।”

कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि किसी उम्मीदवार का नाम वेटिंग लिस्ट में होना नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं देता।

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“जब चयन सूची में शामिल उम्मीदवार को भी नियुक्ति का पक्का हक नहीं मिलता, तो वेटिंग लिस्ट वाले को उससे अधिक अधिकार कैसे मिल सकता है?”

कानून क्या कहता है

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के सेवा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि रिज़र्व लिस्ट से नाम तभी भेजे जा सकते हैं, जब सरकार की ओर से समय रहते औपचारिक मांग की जाए
अगर वेटिंग लिस्ट की वैधता अवधि खत्म हो चुकी हो, तो उसके बाद किसी को नियुक्त करने का आदेश देना कानून के खिलाफ है।

हाईकोर्ट के आदेश क्यों रद्द हुए

पीठ ने माना कि हाईकोर्ट ने भावनात्मक आधार पर उम्मीदवारों को राहत दी, लेकिन कानूनी सीमाओं को नजरअंदाज कर दिया
कोर्ट के शब्दों में,

“न्याय का मतलब यह नहीं कि हम नियमों को तोड़कर राहत दें। सार्वजनिक नियुक्तियों में प्रक्रिया ही सबसे बड़ा संरक्षण है।”

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों मामलों में हाईकोर्ट के सिंगल बेंच और डिविजन बेंच के आदेश रद्द कर दिए
अदालत ने साफ कर दिया कि—

  • RPSC को अपील करने का पूरा अधिकार था।
  • वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति कोई स्वचालित हक नहीं है।
  • बिना सरकार की औपचारिक मांग के कोर्ट नियुक्ति का निर्देश नहीं दे सकता।

यानी, इन तीनों मामलों में वेटिंग लिस्ट के आधार पर दी गई राहत कानूनन टिक नहीं पाई

Case Title: Rajasthan Public Service Commission vs. Yati Jain & Ors.

Case No.: Civil Appeal Nos. 273–275 of 2026

Case Type: Service Law – Recruitment Dispute

Decision Date: 15 January 2026

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