उन्नाव रेप मामले में एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम हलचल देखने को मिली। मामले की पीड़िता ने कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अतिरिक्त सबूत पेश करने की अनुमति मांगी है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई और सेंगर दोनों से जवाब तलब किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में उन्नाव की नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली स्थानांतरित हुआ।
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सेंगर ने अपनी सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जो अब अंतिम चरण की सुनवाई में है।
दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट की एक पीठ ने सेंगर की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दी थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी।
पीड़िता की नई याचिका क्या कहती है
अब पीड़िता ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि उसे और सबूत पेश करने का मौका दिया जाए। खास तौर पर वह अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेज, जैसे स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि, कोर्ट के सामने रखना चाहती है।
पीड़िता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता महमूद प्राचा ने अदालत को बताया,
“हम चाहते हैं कि पीड़िता को यह मौका मिले कि वह ऐसे दस्तावेज पेश कर सके, जो मामले की सही तस्वीर सामने लाते हैं।”
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कोर्ट की अहम टिप्पणियां
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने जब आवेदन देखा तो पाया कि उसमें जरूरी दस्तावेज संलग्न नहीं हैं।
बेंच ने साफ शब्दों में कहा,
“बिना दस्तावेजों के इस आवेदन पर आगे बढ़ना मुश्किल है। आवेदक पक्ष 31 जनवरी तक सभी संबंधित कागजात दाखिल करे।”
इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई और कुलदीप सिंह सेंगर को निर्देश दिया कि वे दो हफ्तों के भीतर इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करें।
सेंगर की ओर से दलीलें
कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि पहले ही अपील अंतिम चरण में है और अब नए सिरे से सबूत जोड़ने की मांग पर कानून के दायरे में ही फैसला होना चाहिए।
इस मामले में पहले भी यह बहस हो चुकी है कि क्या सेंगर को POCSO कानून के तहत “लोक सेवक” माना जाए या नहीं। एक पीठ ने अंतरिम तौर पर कहा था कि प्रथम दृष्टया यह मामला POCSO की धारा 5(सी) के तहत नहीं आता। हालांकि, अंतिम फैसला अभी बाकी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता को 31 जनवरी तक दस्तावेज दाखिल करने का समय दिया है। इसके बाद सीबीआई और सेंगर का जवाब आने पर 25 फरवरी को इस याचिका पर दोबारा सुनवाई होगी।
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अदालत का निर्णय
फिलहाल कोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। लेकिन सीबीआई और कुलदीप सिंह सेंगर से जवाब तलब करते हुए यह साफ कर दिया है कि अतिरिक्त सबूतों की मांग को गंभीरता से परखा जाएगा। अगली सुनवाई 25 फरवरी को तय की गई है।
Case Title: Kuldeep Singh Sengar v. CBI
Case Type: Criminal Appeal (Rape/POCSO)
Decision Date: Next hearing on February 25, 2026










