सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सीमा से कथित तौर पर चरस तस्करी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं और एनडीपीएस कानून के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को पलट दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नवंबर 2016 का है। आरोप था कि रूसी नागरिक डोनियार विल्दानोव को भारत-नेपाल सीमा पर 1.9 किलो चरस के साथ पकड़ा गया था। एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार किया गया।
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ट्रायल कोर्ट ने उसे एनडीपीएस एक्ट की धारा 8, 20 और 23 के तहत दोषी मानते हुए 10 साल की सश्रम कैद और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।
इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि:
- उसे एक दिन पहले ही हिरासत में ले लिया गया था
- तलाशी से पहले उसके कानूनी अधिकार नहीं बताए गए
- बरामदगी दिखावटी थी
- तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया कानून के मुताबिक नहीं हुई
- पासपोर्ट रिकॉर्ड से भी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल खड़े होते हैं
वहीं राज्य सरकार ने कहा कि आरोपी भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर चुका था और उसके बैग से चरस बरामद हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने साक्ष्यों की बारीकी से जांच की। कोर्ट ने कहा:
“रिकॉर्ड से साफ है कि तलाशी पहले ली गई और औपचारिकताएं बाद में पूरी की गईं। यह एनडीपीएस एक्ट की अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन है।”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि-
- तलाशी से पहले मजिस्ट्रेट या गजेटेड अफसर के सामने पेश होने का अधिकार सही तरीके से नहीं बताया गया
- कथित सहमति पत्र अंग्रेज़ी में था, जबकि आरोपी हिंदी/अंग्रेज़ी समझता है या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं
- बरामद बैग का स्पष्ट उल्लेख जब्ती मेमो में नहीं था
- पासपोर्ट पर भारत में प्रवेश की कोई मुहर नहीं थी
- आरोपी के साथ मौजूद पालतू कुत्ते का जिक्र तक रिकॉर्ड में नहीं किया गया
इन सभी तथ्यों ने अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया।
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कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा है।
“जब तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया ही कानून के अनुरूप न हो, तो उस पर आधारित सजा टिक नहीं सकती।”
अदालत ने:
- ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले रद्द किए
- आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया
- पासपोर्ट लौटाने के निर्देश दिए
इसके साथ ही आपराधिक अपील स्वीकार कर ली गई।
Case Title: Doniyar Vildanov vs State of Uttar Pradesh
Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 9460 of 2025
Decision Date: 30 January 2026










