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होटल पर प्रदूषण कार्रवाई में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, एनजीटी जाने की सलाह

हिंद समाचार लिमिटेड और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य - पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बिजली कनेक्शन काटने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आपातकालीन शक्ति का समर्थन किया, होटल को जल अधिनियम के तहत एनजीटी से संपर्क करने का निर्देश दिया।

Shivam Y.
होटल पर प्रदूषण कार्रवाई में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, एनजीटी जाने की सलाह

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर स्थित एक होटल के खिलाफ पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा की गई आपात कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में याचिकाकर्ताओं के पास वैकल्पिक कानूनी उपाय मौजूद है और उन्हें सीधे राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का रुख करना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका द हिंद समाचार लिमिटेड और एक अन्य द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने होटल की बिजली आपूर्ति काटने और संचालन बंद करने से जुड़े आदेशों को रद्द करने की मांग की थी।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 13 जनवरी 2026 को होटल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि होटल का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) ठीक से काम नहीं कर रहे थे और बिना उपचारित गंदा पानी नगर निगम की सीवर लाइन में छोड़ा जा रहा था। इसके अलावा, खतरनाक कचरे के प्रबंधन, जल उपयोग के रिकॉर्ड और अन्य पर्यावरणीय शर्तों में भी गंभीर कमियां पाई गईं।

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इन तथ्यों के आधार पर बोर्ड ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत आपात शक्तियों का उपयोग करते हुए होटल की बिजली आपूर्ति काटने और संचालन बंद करने का निर्देश दिया।

कोर्ट की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ ने पहले यह तय किया कि क्या बिना वैकल्पिक उपाय अपनाए सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि जल अधिनियम बोर्ड को यह अधिकार देता है कि यदि पर्यावरण को गंभीर और तत्काल नुकसान की आशंका हो, तो वह बिना पूर्व सुनवाई के भी कार्रवाई कर सकता है।

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पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की,

“यदि आपात स्थिति में पहले सुनवाई की शर्त लगा दी जाए, तो बोर्ड को दी गई आपात शक्तियों का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।”

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कानून के तहत बोर्ड को केवल कारण दर्ज करना आवश्यक है, उन्हें पहले से संबंधित पक्ष को देना जरूरी नहीं है।

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फैसला

सभी दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को मेरिट पर गए बिना निपटा दिया। कोर्ट ने प्रारंभिक आपत्तियों को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के लिए उचित मंच राष्ट्रीय हरित अधिकरण है।

अंत में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जल अधिनियम की धारा 33B के तहत एनजीटी जाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

Case Title: The Hind Samachar Limited & Another vs State of Punjab & Others

Case Number: CWP-940-2026 (O&M)

Date Pronounced: 23 January 2026

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