नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) और बिहार सरकार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उस आदेश को बहाल कर दिया है, जिसमें M/s Scope Sales Pvt. Ltd. को दी गई ज़मीन का आवंटन रद्द किया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब मामला बड़े सार्वजनिक हित से जुड़ा हो, तब व्यक्तिगत व्यावसायिक हित पीछे हट जाते हैं।
यह मामला पटना के पटलीपुत्र औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उस ज़मीन से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2007 में M/s Scope को मल्टीप्लेक्स और शॉपिंग मॉल बनाने के लिए आवंटित किया गया था। बाद में यही भूमि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के अस्थायी और भविष्य के विस्तार के लिए आवश्यक मानी गई।
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मामला कैसे शुरू हुआ
BIADA ने 2007 में प्लॉट की नीलामी की थी। M/s Scope ने सबसे ऊँची बोली लगाई और करीब ₹3.38 करोड़ में ज़मीन प्राप्त की। कुछ महीनों बाद केंद्र सरकार ने पटना में IIT स्थापित करने का निर्णय लिया।
चूंकि यह ज़मीन सरकारी पॉलिटेक्निक और IIT परिसर से सटी हुई थी, राज्य सरकार ने इसे शैक्षणिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का फैसला किया।
इसके बाद BIADA ने वर्ष 2008 में निर्माण रोकने का निर्देश दिया और 2009 में आवंटन रद्द कर दिया। कंपनी को जमा राशि 5% ब्याज के साथ लौटा दी गई।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की राय
M/s Scope ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।
पहले एकल न्यायाधीश ने BIADA के निर्णय को सही माना और कहा कि IIT जैसे संस्थान के लिए ज़मीन की जरूरत सार्वजनिक हित में है।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस आदेश को पलटते हुए कहा कि BIADA के पास आवंटन रद्द करने का अधिकार नहीं है।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि:
- जनहित सर्वोपरि है, खासकर जब मामला राष्ट्रीय महत्व के शैक्षणिक संस्थान से जुड़ा हो।
- हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच को सिंगल जज के फैसले में दखल नहीं देना चाहिए था।
- BIADA का निर्णय न तो मनमाना था और न ही दुर्भावनापूर्ण।
- जब जमीन की आवश्यकता IIT जैसे संस्थान के लिए हो, तो निजी व्यावसायिक हित पीछे हटेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिट याचिका स्वीकार करना न्यायालय का विवेकाधीन अधिकार है और हर वैधानिक त्रुटि पर हस्तक्षेप ज़रूरी नहीं।
मुआवज़े पर क्या कहा कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि:
- M/s Scope को दी गई ₹3.38 करोड़ की राशि पर 7% वार्षिक ब्याज दिया जाए
- यदि ब्याज की राशि अब तक नहीं दी गई है, तो तीन महीने में भुगतान किया जाए
- ज़मीन का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए होगा, किसी व्यावसायिक कार्य के लिए नहीं
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अंतिम निर्णय
अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश रद्द
- सिंगल जज का फैसला बहाल
- BIADA की कार्रवाई वैध
- IIT के विस्तार को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा जैसे राष्ट्रीय हित के सामने निजी व्यावसायिक नुकसान को वरीयता नहीं दी जा सकती।
Case Title: Bihar Industrial Area Development Authority vs M/s Scope Sales Pvt. Ltd.
Case No.: Civil Appeal No. 929–930 of 2020
Decision Date: 23 January 2026










