असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े कथित “शूटिंग वीडियो” और नफरत भरे बयानों का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को अदालत में इस मुद्दे पर कई याचिकाएं सामने आईं, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी दलों ने शीर्ष अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब तेज हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री को कथित तौर पर एक खास समुदाय के लोगों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया। वीडियो को लेकर भारी आलोचना हुई और बाद में उसे हटा लिया गया।
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इसी के बाद 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिकाकर्ताओं में पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल Najeeb Jung, सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े John Dayal जैसे नाम शामिल हैं।
याचिका में उठाए गए मुद्दे
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान दे रहे हैं, जो समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि असम मुख्यमंत्री के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ नेताओं के बयान भी इस प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। याचिका में कहा गया, “ऐसे वक्तव्य संविधान की मूल भावना, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को कमजोर करते हैं।”
कम्युनिस्ट दलों की अलग याचिकाएं
इसी दिन Communist Party of India (Marxist) और CPI की नेता Annie Raja ने भी अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।
इन याचिकाओं में मुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषणों को लेकर FIR दर्ज करने और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग की गई।
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अदालत में क्या हुआ
मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किया और तत्काल सुनवाई की अपील की।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, राजनीतिक लड़ाइयां अदालत तक पहुंचने लगती हैं। यह एक आम समस्या बन गई है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अदालत इस पर विचार करेगी और उचित समय पर सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
आरोपों की विस्तृत सूची
याचिकाओं में 2021 से 2026 तक दिए गए कई भाषणों और बयानों का हवाला दिया गया है। आरोप है कि इन बयानों में एक समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की बात कही गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन वक्तव्यों का जमीनी असर पड़ा है और लोग इन्हें सही ठहराने लगे हैं।
संवैधानिक सवाल
याचिका में दलील दी गई कि इस तरह के बयान मुख्यमंत्री द्वारा ली गई संवैधानिक शपथ का उल्लंघन हैं। कहा गया कि यह आचरण “सार्वजनिक पद का दुरुपयोग” और “संवैधानिक भरोसे का हनन” है।
याचिकाकर्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सभी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने और सुनवाई की तारीख तय करने का संकेत दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पहले पूरे मामले को देखेगी और फिर आगे की प्रक्रिया पर फैसला करेगी।
Case Title: Communist Party of India (Marxist) v. Union of India
Case No.: Diary No. 8641/2026










