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तीसरी गर्भावस्था पर भी मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री का आदेश रद्द किया

P. Mangaiyarkkarasi बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास उच्च न्यायालय और अन्य - मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि तीसरी गर्भावस्था के लिए मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता है, रजिस्ट्री के आदेश को रद्द कर दिया और कर्मचारी को पूर्ण लाभ देने का निर्देश दिया।

Shivam Y.
तीसरी गर्भावस्था पर भी मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री का आदेश रद्द किया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि तीसरी गर्भावस्था के आधार पर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता P. Mangaiyarkkarasi को मातृत्व अवकाश देने से इनकार किया गया था। यह फैसला न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता P. Mangaiyarkkaras, मद्रास हाईकोर्ट की कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी तीसरी गर्भावस्था के लिए एक वर्ष का मातृत्व अवकाश मांगा था। हालांकि, 15 दिसंबर 2025 को रजिस्ट्री (प्रबंधन) ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि तमिलनाडु फंडामेंटल रूल्स में तीसरी संतान या तीसरे प्रसव के लिए मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है।

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इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस आदेश को मनमाना व कानून के खिलाफ बताया।

अदालत की सुनवाई और अवलोकन

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह नोट किया कि इसी तरह का मुद्दा पहले भी अदालत के सामने आ चुका है। सितंबर 2025 में एक डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार फैसले का पालन करते हुए तीसरी गर्भावस्था के लिए मातृत्व अवकाश देने का आदेश दिया था।

अदालत ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री यह तर्क नहीं दे सकती कि पहले दिया गया फैसला केवल उसी याचिकाकर्ता तक सीमित था। पीठ ने टिप्पणी की,

“न्यायालय के ऐसे निर्णय, जिनमें कानून का सिद्धांत तय किया गया हो, उन्हें केवल ‘व्यक्तिगत’ आदेश बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

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रजिस्ट्री के रवैये पर सख्त टिप्पणी

पीठ ने रजिस्ट्री के दृष्टिकोण को “अत्यधिक तकनीकी और अनुचित” बताया। अदालत ने कहा कि बार-बार समान परिस्थितियों में मातृत्व अवकाश से इनकार करना महिला कर्मचारियों के लिए पीड़ादायक है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी पत्रों के आधार पर न्यायालय के निर्णयों को कमजोर नहीं किया जा सकता।

“जब दो डिवीजन बेंच पहले ही इस मुद्दे पर स्पष्ट आदेश दे चुकी हैं, तो अधिकारियों को उस कानूनी सिद्धांत को समझना और लागू करना चाहिए,” पीठ ने कहा।

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अदालत का फैसला

हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 8 अगस्त 2025 से 7 अगस्त 2026 तक पूरे एक वर्ष का मातृत्व अवकाश दिया जाए। इसके साथ ही, इस अवधि के सभी सेवा और वेतन संबंधी लाभ भी बहाल करने के आदेश दिए गए।

अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि इस फैसले की प्रति राज्य भर के जिला न्यायालयों में भेजी जाए, ताकि भविष्य में इसी तरह के मामलों में नियमों का सही पालन हो सके।

याचिका स्वीकार कर ली गई और किसी भी प्रकार की लागत नहीं लगाई गई।

Case Title: P. Mangaiyarkkarasi v. The Registrar General, High Court of Madras & Anr.

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