सुप्रीम कोर्ट ने स्टील आयात से जुड़े एक अहम मामले में साफ किया है कि किसी सरकारी अधिसूचना (नोटिफिकेशन) की कानूनी प्रभावशीलता उसकी ऑफिशियल गजट में प्रकाशन की तारीख से ही मानी जाएगी। केवल वेबसाइट पर अपलोड होना कानूनन पर्याप्त नहीं है। यह फैसला आयात–निर्यात कारोबार से जुड़े हजारों व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला Viraj Impex Pvt. Ltd. सहित कई आयातक कंपनियों द्वारा दायर अपीलों से जुड़ा था। ये कंपनियां चीन और दक्षिण कोरिया से स्टील उत्पादों का आयात करती थीं।फरवरी 2016 से पहले तक ये स्टील उत्पाद बिना किसी प्रतिबंध के आयात किए जा सकते थे। इसी दौरान कंपनियों ने विदेशी सप्लायर्स के साथ पक्के अनुबंध किए और 5 फरवरी 2016 को अपरिवर्तनीय लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) भी खोल दिए।
उसी दिन, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने स्टील उत्पादों पर न्यूनतम आयात मूल्य (Minimum Import Price – MIP) लागू करने वाला नोटिफिकेशन अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया। हालांकि, यह नोटिफिकेशन 11 फरवरी 2016 को आधिकारिक गजट में प्रकाशित हुआ।
कंपनियों का कहना था कि चूंकि उन्होंने LC गजट में प्रकाशन से पहले खोल दिए थे, इसलिए उन पर नया MIP लागू नहीं होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि नोटिफिकेशन 11 फरवरी 2016 से लागू हुआ, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि 5 फरवरी को वेबसाइट पर अपलोड होने से आयातकों को पर्याप्त सूचना मिल गई थी। इसी आधार पर याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण से असहमति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“कानून बनने के लिए उसका अस्तित्व जरूरी है, और अस्तित्व के लिए उसका विधिवत प्रकाशन।”
अदालत ने कहा कि प्रतिनिधि कानून (delegated legislation) तब तक लागू नहीं माना जा सकता, जब तक वह उस तरीके से प्रकाशित न हो, जैसा कि मूल कानून में तय किया गया है।
यहां विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 स्पष्ट रूप से कहता है कि ऐसे आदेश ऑफिशियल गजट में प्रकाशित होने चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वेबसाइट पर अपलोड करना केवल सूचना हो सकती है, लेकिन उससे कानूनी दायित्व पैदा नहीं होता।
पीठ ने विदेश व्यापार नीति (FTP) के पैरा 1.05(b) का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी वस्तु पर बाद में प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उस प्रतिबंध से पहले खोले गए वैध LC के तहत आयात को संरक्षण मिलना चाहिए।
कोर्ट ने टिप्पणी की:
“अप्रकाशित अधिसूचना के आधार पर व्यापारियों पर बोझ डालना कानून के शासन के खिलाफ है।”
अंतिम निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर निर्णय दिया कि:
- नोटिफिकेशन की ‘तारीख’ का अर्थ वही तारीख है, जब वह आधिकारिक गजट में प्रकाशित हुआ
- इस मामले में MIP नोटिफिकेशन 11 फरवरी 2016 से पहले लागू नहीं माना जा सकता
- जिन आयातकों ने इससे पहले LC खोल दिए थे, उन्हें संरक्षण मिलेगा
इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और आयातक कंपनियों के पक्ष में अपीलें स्वीकार कर लीं।
Case Title: Viraj Impex Pvt. Ltd. v. Union of India & Another










