सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट द्वारा अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामला कानूनी बहस से अधिक पेशेवर आचरण और पश्चाताप से जुड़ा है, जिसे हाईकोर्ट ही बेहतर तरीके से देख सकता है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह टिप्पणी की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी और न्यायाधीश के बीच तीखी बहस से जुड़ा है। इस बातचीत का एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

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वीडियो का संज्ञान लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की। इसके बाद महेश तिवारी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि वायरल हुए छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स ने पूरे घटनाक्रम को गलत संदर्भ में पेश किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो अब एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं।
दवे ने यह भी कहा कि अधिवक्ता का किसी न्यायाधीश का अपमान करने या न्यायिक कार्य में बाधा डालने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को अपने व्यवहार पर खेद है और वह झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी देने को तैयार हैं।
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अदालत की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाईकोर्ट की अधिकारिता को कमजोर नहीं करेगा।
“अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है तो उन्हें वहां जाकर कार्यवाही का सामना करना चाहिए। और अगर उन्हें लगता है कि उनसे गलती हुई है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए,” पीठ ने कहा।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि न्यायपालिका के हर स्तर पर कभी-कभी पेशेवर अहंकार के कारण बार और बेंच के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है।
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फैसला
सभी पक्षों की दलीलें दर्ज करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने अधिवक्ता महेश तिवारी को यह स्वतंत्रता दी कि वे झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल करें।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करे।
इसके साथ ही मामला समाप्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार झारखंड हाईकोर्ट पर छोड़ दिया।
Case Title: Mahesh Tiwari v. The Registrar General of the High Court of Jharkhand at Ranchi
Bench: CJI Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi
Hearing Date: January 23, 2026










