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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एटॉमिक एनर्जी विभाग के कर्मचारी ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे से बाहर

एन. मनोहरन एवं अन्य बनाम प्रशासनिक अधिकारी एवं अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने भारी पानी संयंत्र के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी एक्ट से बाहर माना, कहा वे CCS पेंशन नियमों के तहत ही लाभ पाएंगे।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: एटॉमिक एनर्जी विभाग के कर्मचारी ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे से बाहर

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया कि भारी पानी संयंत्र (Heavy Water Plant), तूतीकोरिन के कर्मचारी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत ग्रेच्युटी पाने के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि ये कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन सिविल पदों पर कार्यरत हैं और पहले से ही केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के तहत लाभ पा रहे हैं।

न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की अपीलें खारिज कर दीं।

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मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारी पानी संयंत्र, जो परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) के अंतर्गत संचालित होता है, के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को 2014 में पेंशन भुगतान आदेश जारी हुआ। उन्हें ग्रेच्युटी CCS (Pension) Rules, 1972 के तहत दी गई।

कर्मचारी का तर्क था कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत मिलने वाली राशि अधिक है, इसलिए अंतर की राशि उन्हें दी जानी चाहिए।

इस मांग को लेकर मामला कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास गया, जिसने कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया। बाद में अपीलीय प्राधिकरण ने भी यह माना कि संयंत्र एक "इंडस्ट्री" है और कर्मचारी ग्रेच्युटी एक्ट के तहत आते हैं।

हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस निर्णय को पलट दिया। उसी आदेश को चुनौती देते हुए कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

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अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि भारी पानी संयंत्र एक औद्योगिक प्रतिष्ठान है। उनका कहना था कि संयंत्र को कामकाज और नियुक्तियों में पर्याप्त स्वायत्तता दी गई है, इसलिए उसे एक अलग इकाई माना जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार को ग्रेच्युटी एक्ट से छूट चाहिए थी, तो धारा 5 के तहत विशेष अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि संयंत्र कोई अलग कंपनी या सार्वजनिक उपक्रम नहीं है। यह सीधे परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक परियोजना है।

उन्होंने कहा, “कर्मचारी खुद स्वीकार करते हैं कि संयंत्र कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं है। फिर वे कैसे इसे अलग कानूनी इकाई मान सकते हैं?”

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

पीठ ने सबसे पहले यह तय किया कि क्या कर्मचारी ग्रेच्युटी एक्ट की धारा 2(ई) के तहत "कर्मचारी" की परिभाषा में आते हैं या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि इस धारा में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जो व्यक्ति केंद्र सरकार के अधीन पद धारण करता है और किसी अन्य नियम के तहत ग्रेच्युटी पा रहा है, वह इस एक्ट के दायरे से बाहर है।

पीठ ने कहा,

“जब कोई व्यक्ति पहले से ही किसी अन्य अधिनियम या नियम के तहत ग्रेच्युटी प्राप्त कर रहा हो, तो वह ग्रेच्युटी एक्ट की परिभाषा में नहीं आएगा।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली” वाले पुराने फैसले की तुलना इस मामले से नहीं की जा सकती, क्योंकि वहां कर्मचारी मूल रूप से निगम के कर्मचारी थे, जबकि यहां कर्मचारी सीधे केंद्र सरकार के अधीन हैं।

पीठ ने भारी पानी संयंत्र की स्थिति पर विस्तार से विचार किया। कोर्ट ने पाया कि यह न तो कंपनी है, न सार्वजनिक उपक्रम, न ही कोई अलग कॉरपोरेट निकाय। यह केवल परमाणु ऊर्जा विभाग की एक परियोजना है।

फैसले में कहा गया,

“भारी पानी संयंत्र को विभाग से अलग कर स्वतंत्र इकाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह विभाग का एक सहायक अंग है।”

कर्मचारियों ने धारा 14 (ओवरराइडिंग प्रभाव) का हवाला दिया था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब वे शुरुआत में ही एक्ट की परिभाषा से बाहर हैं, तो यह धारा लागू नहीं होती।

इसी तरह, छूट की अधिसूचना (धारा 5) की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि एक्ट स्वयं उन्हें बाहर करता है।

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से सहमति जताई और सभी सिविल अपीलें खारिज कर दीं। इसके साथ ही लंबित सभी आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भारी पानी संयंत्र के कर्मचारी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत दावा नहीं कर सकते और उन्हें केवल CCS (Pension) Rules, 1972 के तहत ही ग्रेच्युटी मिलेगी।

Case Title: N. Manoharan & Ors. vs The Administrative Officer & Anr.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) Nos. 22628–22637 of 2024 & connected matters

Decision Date: February 11, 2026

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