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सोनम वांगचुक की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र से फिर पूछा - हिरासत समीक्षा में अब तक क्या हुआ?

गीतांजलि जे. आंगमो बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य। सोनम वांगचुक हिरासत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कड़ी पूछताछ की, सेहत पर चिंता जताई और बुधवार को सुनवाई तय की।

Vivek G.
सोनम वांगचुक की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र से फिर पूछा - हिरासत समीक्षा में अब तक क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सुनवाई के दौरान माहौल कुछ तल्ख रहा। केंद्र सरकार की ओर से जब यह बताया गया कि हिरासत की समीक्षा पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, तो पीठ ने साफ तौर पर असंतोष जताया और स्वास्थ्य को लेकर अपनी चिंता दोहराई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जो डॉ. गीतांजलि अंगमो ने अपने पति सोनम वांगचुक की ओर से दायर की है। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत हुई उनकी हिरासत को अवैध बताया गया है।

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वांगचुक पिछले करीब पाँच महीनों से हिरासत में हैं और उनकी सेहत को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। पेट दर्द और दूषित पानी से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया गया।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ

जैसे ही मामला लंच से पहले उठा, केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने यह कहते हुए समय मांगा कि वे एक अन्य मामले में व्यस्त हैं। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने तुरंत सवाल दागा,

“क्या हिरासत की समीक्षा पर कोई प्रगति हुई है? कोर्ट ने पिछली बार यही कहा था।”

सरकारी पक्ष से सीधा जवाब आया - “नहीं, अभी तक कुछ नहीं हुआ।”
यह सुनकर पीठ की नाराज़गी साफ झलकने लगी।

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स्वास्थ्य को लेकर अदालत की चिंता

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक की हालत “पूरी तरह ठीक” है और उन्हें AIIMS जोधपुर में बेहतरीन इलाज मिल रहा है। सरकारी वकील ने यहां तक कहा कि लद्दाख की तुलना में राजस्थान में इलाज की सुविधाएं बेहतर हैं।

इस पर जस्टिस पी.बी. वराले ने तुरंत टोका,
ऐसा आप नहीं कह सकते। समस्या है, डॉक्टर ने भी माना है और इलाज चल रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से मौजूद वकीलों ने भी कहा कि वांगचुक की तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है और लंबे समय से हिरासत में रखना अब उचित नहीं है।

पहले भी दी जा चुकी है सलाह

गौरतलब है कि इससे पहले 4 फरवरी को भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वह वांगचुक की हिरासत की समीक्षा करे, खासकर तब जब वे पहले ही पाँच महीने हिरासत में बिता चुके हैं। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट को भी “संतोषजनक नहीं” माना था।

केंद्र सरकार ने अपने रुख में कहा कि वांगचुक की हिरासत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। सरकार के मुताबिक, लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में कथित तौर पर भड़काऊ गतिविधियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया।

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अदालत का अंतिम निर्देश

सुनवाई के अंत में अदालत ने साफ कर दिया कि यह हैबियस कॉर्पस का मामला है और इसे टाला नहीं जा सकता।

जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा,“इस तरह के मामलों में बार-बार स्थगन नहीं हो सकता।”

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई बुधवार को होगी और अब कोई और टालमटोल स्वीकार नहीं की जाएगी।

Case Title: Gitanjali J. Angmo v. Union of India & Ors.

Case No.: W.P. (Crl.) No. 399/2025

Case Type: Habeas Corpus Petition

Decision Date: 9 February 2026

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