आज सुप्रीम कोर्ट की अदालत में माहौल गंभीर था। एक पुराने हत्या मामले में न्याय की प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। मामला था पंजाब सरकार बनाम सरबजीत सिंह का, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा दी गई बरी की सज़ा को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि बिना ठोस कारण के किसी दोषसिद्धि को पलटना न्यायसंगत नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला साल 2001 का है। 13 जुलाई 2001 को पंजाब के श्री हरगोबिंदपुर थाने में एक एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि सरबजीत सिंह ने घरेलू विवाद के दौरान अपनी पत्नी पर ‘दातर’ से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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जांच और सुनवाई के बाद, सेशंस कोर्ट, गुरदासपुर ने 8 मई 2003 को सरबजीत सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और ₹2000 जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।
हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। करीब 16 साल बाद, 14 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट का फैसला पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
हाईकोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राज्य की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट ने बिना ठोस वजह बताए गंभीर अपराध में दी गई सज़ा को रद्द कर दिया।
सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट का फैसला “बहुत संक्षिप्त” है और उसमें गवाहों के बयान व सबूतों का सही विश्लेषण नहीं किया गया। वैकल्पिक रूप से यह भी कहा गया कि यदि सुप्रीम कोर्ट खुद मामले के गुण-दोष पर नहीं जाना चाहता, तो कम से कम हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया जाए।
वहीं, आरोपी की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला सही था और उसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है।
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अदालत की टिप्पणी
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि केवल तथ्यों और गवाहों के बयान गिनवा देना पर्याप्त नहीं होता।
पीठ ने टिप्पणी की,
“सिर्फ गवाही का उल्लेख कर देना, बिना किसी कानूनी विश्लेषण के, दोषसिद्धि को बरी में नहीं बदला जा सकता।”
अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट का फैसला अनुमानों और अटकलों पर आधारित प्रतीत होता है, जो आपराधिक मामलों में स्वीकार्य नहीं है।
अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी 2019 के हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट को भेज दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दे रही है।
साथ ही निर्देश दिया गया कि आरोपी सरबजीत सिंह को संबंधित सेशंस कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए और वह जमानत बांड भरे, जिसकी शर्तें सेशंस कोर्ट तय करेगा।
इस तरह, सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि गंभीर आपराधिक मामलों में फैसले तर्क और ठोस कारणों पर आधारित होने चाहिए।
Case Title: State of Punjab vs. Sarabjit Singh
Case No.: Criminal Appeal No. 1781 of 2019
Decision Date: 28 January 2026










