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अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: विशेषज्ञ समिति बनेगी, अवैध खनन पर कड़ी निगरानी

अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा और संबंधित मुद्दे, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा पर एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, पर्यावरण विशेषज्ञों के नाम मांगे हैं और अवैध खनन के खिलाफ चेतावनी दी है।

Vivek G.
अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: विशेषज्ञ समिति बनेगी, अवैध खनन पर कड़ी निगरानी

अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और वहां हो रहे खनन को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने साफ किया कि अब इस संवेदनशील मुद्दे की जांच एक विशेषज्ञ समिति करेगी, जो सीधे अदालत की निगरानी में काम करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस समय चर्चा में आया जब नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की एक सीमित परिभाषा को मंजूरी दी थी। उस आदेश के अनुसार, केवल वे क्षेत्र ही अरावली माने गए थे जिनकी ऊंचाई स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो।

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इस फैसले के बाद पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने आशंका जताई कि इससे अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खनन के लिए खुल सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र इस परिभाषा से बाहर हो जाता।

बढ़ते विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को अपने ही पहले आदेश पर रोक लगा दी थी और मामले की दोबारा सुनवाई शुरू की थी।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

बुधवार को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अब इस पूरे मुद्दे की जांच एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति करेगी।

कोर्ट ने कहा-“हम चाहते हैं कि इस विषय से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच हो। इसलिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो सीधे इस अदालत की निगरानी में काम करेगी।”

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पीठ ने एमिकस क्यूरी के. परमेश्वरम, एएसजी ऐश्वर्या भाटी और के.एम. नटराज से कहा कि वे पर्यावरणविदों, वन विशेषज्ञों और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाएं, ताकि एक संतुलित और सक्षम समिति बनाई जा सके।

सुनवाई के दौरान क्या कहा गया

राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में नए खनन पट्टे दिए जा रहे हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा-
“अवैध खनन एक गंभीर अपराध है। इससे अपूरणीय क्षति हो सकती है। यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो उसे तुरंत रोका जाएगा।”

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि पहाड़ियों की कोई स्थायी या सटीक परिभाषा नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा,“पर्वत कोई स्थिर संरचना नहीं होते। भूगर्भीय परतें बदलती रहती हैं। अगर हम अरावली को परिभाषित करने लगे, तो यह एक खतरनाक शुरुआत होगी।”

राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अरावली क्षेत्र में कोई भी अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।

कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि 29 दिसंबर 2025 को दिया गया अंतरिम आदेश आगे भी लागू रहेगा।

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कोर्ट का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि-

  • अरावली से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी
  • समिति अदालत की सीधी निगरानी में काम करेगी
  • किसी भी तरह का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं होगा
  • राज्य सरकारों को सख्ती से निगरानी सुनिश्चित करनी होगी
  • अगली सुनवाई तक पहले से जारी अंतरिम आदेश लागू रहेगा

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में जल्दबाजी नहीं, बल्कि पर्यावरण और कानून दोनों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा।

Case Title: In Re: Definition of Aravalli Hills and Ranges and Ancillary Issues

Case No.: SMW(C) No. 10/2025

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