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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पलटा, संपत्ति सौदे में जालसाजी के आरोपों पर सुनवाई बहाल

योगेश कुमार गोयल और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया। फर्जी दस्तावेज़ और धोखाधड़ी के आरोपों पर ट्रायल जारी रहेगा।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पलटा, संपत्ति सौदे में जालसाजी के आरोपों पर सुनवाई बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई आपराधिक कार्यवाही को बहाल कर दिया है। मामला संपत्ति बिक्री से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और दस्तावेज़ों की जालसाजी का है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि ऐसे आरोपों की जांच ट्रायल में होनी चाहिए, न कि शुरुआती स्तर पर खारिज की जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2016 का है, जब संपत्ति के मालिक ने अपनी संपत्ति बेचने के लिए एक समझौता किया था। सौदा ₹38.50 लाख में तय हुआ और ₹5 लाख बतौर बयाना दिया गया। समझौते के अनुसार 31 अगस्त 2016 तक रजिस्ट्री होनी थी।

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शिकायतकर्ता का आरोप है कि तय समय पर बिक्री विलेख नहीं कराया गया। इसके बाद कथित रूप से एक फर्जी एक्सटेंशन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया, जिसमें ₹33 लाख भुगतान दिखाया गया। आरोप यह भी है कि उसी आधार पर बिजली कनेक्शन लिया गया और फर्जी शपथपत्र लगाया गया।

अदालत की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप केवल सिविल विवाद तक सीमित नहीं हैं।

पीठ ने टिप्पणी की-“जब दस्तावेज़ों की जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हों, तो उन्हें प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि यदि वाकई पूरी राशि पहले ही दे दी गई थी, तो फिर बिक्री विलेख क्यों नहीं कराया गया-यह सवाल जांच का विषय है।

हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की राय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले यह कहते हुए एफआईआर रद्द कर दी थी कि मामला सिविल प्रकृति का है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराया।

कोर्ट ने कहा कि,“जहां जालसाजी और कूट रचना के ठोस आरोप हों, वहां हाईकोर्ट को ट्रायल से पहले हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।”

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कहा कि मामला ट्रायल कोर्ट में चलेगा। शिकायत और समन आदेश को बहाल कर दिया गया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी और फिलहाल कार्यवाही रोकने का कोई आधार नहीं है।

Case Title: Yogesh Kumar Goel & Anr. vs State of Uttar Pradesh & Anr.

Case No.: Criminal Appeal No. 208 of 2026

Decision Date: 12 January 2026

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