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जीवनसाथी चुनने का अधिकार केवल दंपत्ति का है, समाज या माता-पिता का नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

लक्ष्मी देवी और अन्य बनाम राज्य (NCT ऑफ दिल्ली) और अन्य - दिल्ली उच्च न्यायालय ने पारिवारिक धमकियों का सामना कर रहे एक विवाहित जोड़े के लिए पुलिस सुरक्षा का आदेश दिया, कहा कि जीवनसाथी चुनने का अधिकार अनुच्छेद 21 और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।

Shivam Y.
जीवनसाथी चुनने का अधिकार केवल दंपत्ति का है, समाज या माता-पिता का नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश में उस जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया, जिन्होंने अपनी मर्जी से शादी की थी और अब परिवार की ओर से धमकियों का सामना कर रहे थे। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बालिग लोगों की पसंद की शादी संविधान के तहत सुरक्षित है और इसमें कोई भी बेवजह दखल नहीं दे सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

लक्ष्मी देवी और उनके पति ने संविधान के अनुच्छेद 226 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई 2025 को आर्य समाज रीति-रिवाज से शादी की और बाद में इसे विधिवत रजिस्टर भी कराया। लेकिन लड़की के पिता इस शादी से नाराज़ थे और कथित तौर पर दोनों को धमकियां दे रहे थे। इसी वजह से दंपति ने अदालत से अपनी जान और आज़ादी की सुरक्षा की मांग की।

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह भी बताया कि वे एक अलग प्रार्थना को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जो एक पुराने मामले में पुलिस कार्रवाई से जुड़ी थी। मामला मुख्य रूप से सुरक्षा के सवाल तक सीमित रखा गया।

अदालत की टिप्पणियां

कोर्ट ने कहा कि शादी करना हर व्यक्ति की निजी पसंद का हिस्सा है और यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी ज़िक्र किया।

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अदालत ने कहा,

“पसंद की शादी करना व्यक्ति की आज़ादी का हिस्सा है और इसमें समाज या परिवार की मर्जी थोपना ठीक नहीं।”

एक और जगह पीठ ने यह भी जोड़ा कि

“कोई भी, यहां तक कि माता-पिता भी, बालिग दंपति की जिंदगी और आज़ादी को खतरे में नहीं डाल सकते।”

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हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि किसी भी बालिग को अपनी पसंद के साथी से शादी करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं है, तो वे अधिक से अधिक सामाजिक दूरी बना सकते हैं, लेकिन धमकी या हिंसा बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। इन सिद्धांतों को मौजूदा मामले में भी पूरी तरह लागू माना गया।

फैसला

इन सब बातों को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली और पुलिस को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर दंपति को तुरंत सुरक्षा दी जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर वे किसी दूसरे इलाके में रहते हैं, तो वहां की पुलिस को अपनी जानकारी देनी होगी ताकि सुरक्षा जारी रह सके।

इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title:- Laxmi Devi & Anr. vs State (NCT of Delhi) & Ors.

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