दिल्ली की सर्द सुबह में सुप्रीम कोर्ट की कोर्टरूम संख्या में हलचल कुछ ज्यादा थी। मशहूर फिल्म निर्माता Vikram Bhatt और उनकी पत्नी Shwetambari V Bhatt की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। मामला करीब ₹30 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने अंततः दंपति को अंतरिम जमानत दे दी।
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मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता Dr Ajay Murdia, जो Indira Group of Companies के प्रमुख हैं, ने आरोप लगाया है कि फिल्म निर्माण के नाम पर बड़ी राशि ली गई और उसका दुरुपयोग किया गया।
समझौते के मुताबिक चार फिल्मों के निर्माण के लिए लगभग ₹47 करोड़ का करार हुआ था। आरोप है कि विभिन्न चरणों में ₹42 करोड़ से अधिक रकम अलग-अलग वेंडरों के नाम पर जारी की गई। लेकिन केवल एक फिल्म रिलीज हुई, दूसरी अधूरी रही, तीसरी लगभग 25% तक ही बन सकी और चौथी की शूटिंग शुरू ही नहीं हुई।
एफआईआर राजस्थान के उदयपुर के भूपालपुरा थाने में दर्ज की गई। दिसंबर 2025 में दोनों की गिरफ्तारी हुई और वे न्यायिक हिरासत में थे।
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हाईकोर्ट से निराशा, सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा
31 जनवरी को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि आरोप गंभीर हैं और जांच अभी जारी है। इसके बाद दंपति ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की।
दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Mukul Rohatgi पेश हुए। उन्होंने अदालत में कहा,
“एक कमर्शियल एग्रीमेंट को आपराधिक मामला बना दिया गया है। क्या हर असफल फिल्म का मतलब जेल है?”
उन्होंने यह भी दलील दी कि यह एक व्यापारिक विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है।
अदालत में तीखी बहस
राज्य की ओर से वकील ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा, “यह कोई साधारण मामला नहीं है। ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।”
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने सीधा सवाल किया,
“लेकिन आपराधिक कानून का इस्तेमाल पैसे की वसूली के लिए नहीं किया जा सकता।”
कोर्टरूम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। मुख्य न्यायाधीश ने भी संकेत दिया कि अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या यह मामला मूल रूप से सिविल विवाद है या आपराधिक अपराध।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश
संक्षिप्त सुनवाई के बाद पीठ ने कहा:
“नोटिस जारी किया जाता है। याचिकाकर्ताओं को तुरंत अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वे जमानती बांड भरें। अगली सुनवाई अगले गुरुवार को होगी।”
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता, जो Indira Entertainment LLP के मालिक हैं, उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया जाए ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की गई है।
अदालत का स्पष्ट संदेश
सुनवाई के दौरान पीठ का एक कथन खास तौर पर ध्यान खींच गया। जजों ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली को “वसूली का माध्यम” नहीं बनाया जा सकता। यह टिप्पणी सुनवाई का केंद्रीय बिंदु बन गई।
हालांकि, अदालत ने अभी आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। जांच जारी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है।
Case Title: Shwetambari V Bhatt & Anr vs. State of Rajasthan
Case No.: SLP (Criminal) – Number Not Specified
Decision Date: February 13, 2026










