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केरल टीवी बाज़ार में दबदबे के आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने JioStar के खिलाफ CCI जांच रोकने से किया इनकार

जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और अन्य - सर्वोच्च न्यायालय ने केरल के टीवी बाजार में प्रभुत्व के कथित दुरुपयोग और अनुचित छूट के मामले में जियोस्टार के खिलाफ सीसीआई की जांच जारी रखने की अनुमति दी।

Shivam Y.
केरल टीवी बाज़ार में दबदबे के आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने JioStar के खिलाफ CCI जांच रोकने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 27 जनवरी को JioStar ब्रॉडकास्टिंग कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने केरल के केबल टीवी बाज़ार में कथित प्रभुत्व के दुरुपयोग को लेकर चल रही जांच पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।

यह मामला न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष आया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद एशियानेट डिजिटल नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (ADNPL) की शिकायत से शुरू हुआ। ADNPL ने आरोप लगाया कि JioStar, जो केरल में लोकप्रिय टीवी चैनलों और बड़े खेल आयोजनों के प्रसारण अधिकार रखती है, ने अपनी मजबूत बाज़ार स्थिति का अनुचित लाभ उठाया।

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शिकायत के अनुसार, JioStar ने केरल कम्युनिकेशंस केबल लिमिटेड (KCCL) को विशेष और भारी छूट दी, जिससे अन्य सेवा प्रदाताओं को नुकसान हुआ। ADNPL का कहना था कि कुछ ही महीनों में उसके बड़ी संख्या में ग्राहक दूसरी ओर चले गए।

यह भी आरोप लगाया गया कि निर्धारित सीमा से अधिक छूट को “मार्केटिंग” और “प्रमोशनल भुगतान” के नाम पर दिया गया, ताकि नियामकीय नियमों से बचा जा सके।

CCI की कार्रवाई

शिकायत की जांच के बाद, फरवरी 2022 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने प्रारंभिक राय बनाई कि मामले की विस्तृत जांच जरूरी है। इसके बाद आयोग ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 26(1) के तहत महानिदेशक को जांच के आदेश दिए।

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हाईकोर्ट का रुख

JioStar ने CCI के आदेश को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का तर्क था कि मूल्य निर्धारण और छूट से जुड़े मुद्दे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

हालांकि, एकल न्यायाधीश ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। बाद में, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी कहा कि प्रभुत्व के दुरुपयोग के आरोप प्रतिस्पर्धा कानून के अंतर्गत आते हैं और CCI को इसकी जांच का अधिकार है।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में JioStar की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि कंपनी पहले से ही TRAI के नियमों के अधीन है। इस पर न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा,

“यह शुरुआती जांच का चरण है और इसकी पड़ताल होना ज़रूरी है।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद सभी कानूनी प्रश्नों पर विचार किया जा सकता है।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने JioStar की याचिका खारिज करते हुए CCI को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।

Case Title: JioStar India Private Limited v. Competition Commission of India & Others

Case Number: SLP (Civil) No. 2867 of 2026

Date of Order: January 27, 2026

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