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कन्याकुमारी मंदिर के प्राचीन मंडप में दुकानों पर सख्त आदेश, मद्रास हाईकोर्ट ने हटाने के दिए निर्देश

नागराजन बनाम जिला कलेक्टर और अन्य, मद्रास हाईकोर्ट ने कन्याकुमारी मंदिर के प्राचीन मंडप में चल रही दुकानों को हटाने का आदेश दिया, HR&CE विभाग पर सख्त टिप्पणी।

Vivek G.
कन्याकुमारी मंदिर के प्राचीन मंडप में दुकानों पर सख्त आदेश, मद्रास हाईकोर्ट ने हटाने के दिए निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कन्याकुमारी स्थित प्रसिद्ध मंदिर के एक प्राचीन पत्थर मंडप में चल रही दुकानों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि मंदिर के अंदर किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

10 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत का रुख इतना सख्त था कि कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग ध्यान से हर शब्द सुन रहे थे।

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मामला क्या है?

यह याचिका नागराजन ने दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि कन्याकुमारी के 17वें वार्ड में स्थित अरुल्मिगु कन्याकुमारी भगवथीअम्मन थिरुकोविल मंदिर के ‘कन्नियाम्बलम’ कल मंडप को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि मंडप के भीतर और आसपास किराये की दुकानों ने ईंट की दीवारें खड़ी कर दी हैं। इससे प्राचीन संरचना को नुकसान पहुंच रहा है।

कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज है कि मंदिर का प्रबंधन हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट (HR & CE) विभाग के अधीन है।

पृष्ठभूमि

22 सितंबर 2025 को अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही तस्वीरों को देखकर चिंता जताई थी। तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि मंदिर के बाहर बनी दुकानों ने ईंट का काम कर मंडप के अंदर तक विस्तार कर लिया है।

तब अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि “मंदिर के मंडप के भीतर कोई भी व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती।”

इसके बाद जिन लोगों ने मंडप में दुकानें चला रखी थीं, उन्हें भी मामले में पक्षकार बनाया गया। इन दुकानदारों की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी थी।

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अदालत की कड़ी टिप्पणी

10 फरवरी की सुनवाई में जस्टिस डॉ. जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की पीठ ने जब प्राचीन पत्थर मंडप की स्थिति देखी, तो नाराजगी छिपी नहीं रही।

पीठ ने कहा, “हम यह देखकर स्तब्ध हैं कि उत्कृष्ट कलाकारी वाली प्राचीन संरचना को किराये पर दे दिया गया। संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने के बजाय इसे व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया।”

अदालत ने यह भी पाया कि मंडप के अंदर निर्माण सामग्री, कचरा और अन्य मलबा रखा गया है। इससे ऐतिहासिक ढांचे को और नुकसान हो रहा है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संयुक्त आयुक्त द्वारा दी गई अनुमति अवैध है। “मंदिर की प्राचीन और एंटीक संरचना को नुकसान पहुंचाने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह किरायेदार ही क्यों न हो,” पीठ ने टिप्पणी की।

अदालत ने HR & CE विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि विभाग का दायित्व मंदिर संपत्ति की रक्षा करना है, न कि उससे वित्तीय लाभ कमाना।

पीठ ने माना कि अगर अतिक्रमण एक दिन भी जारी रहा, तो संरचना को और नुकसान होगा। इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

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कोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट ने संयुक्त आयुक्त, HR & CE विभाग, कन्याकुमारी को निर्देश दिया कि पुलिस की मदद से पूरे अतिक्रमण को हटाया जाए।

अदालत ने आदेश दिया कि:

  • मंडप के अंदर और आसपास के सभी अवैध निर्माण हटाए जाएं,
  • क्षेत्र को सील किया जाए,
  • 12 फरवरी 2026 तक फोटो सहित रिपोर्ट दाखिल की जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर संपत्ति की सुरक्षा में विफल अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई अगली सुनवाई में तय की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी 2026 को दोपहर 2:15 बजे तय की गई है।

Case Title: Nagarajan vs The District Collector & Others

Case No.: W.P.(MD) No. 26210 of 2025

Decision Date: 10 February 2026

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