पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद मामले में कहा है कि केवल संदेह या अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पत्नी पर व्यभिचार (adultery) का आरोप लगाकर तलाक नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में ठोस तथ्य, तारीख, समय और संबंधित व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख जरूरी होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला पति श्याम बिहारी मिश्रा द्वारा दायर तलाक याचिका से जुड़ा था। पति ने दावा किया था कि वर्ष 2003 में शादी के बाद शुरुआती दो वर्षों तक संबंध सामान्य रहे, लेकिन बाद में पत्नी का व्यवहार बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी बिना बताए घर से बाहर जाती थी और एक अन्य व्यक्ति के साथ संबंध में थी।
पति ने यह भी कहा कि 15 अक्टूबर 2012 को उन्होंने पत्नी को एक सिनेमा हॉल से एक पुरुष के साथ लौटते देखा था। इसी आधार पर उन्होंने फैमिली कोर्ट, सिवान में तलाक की याचिका दायर की थी। हालांकि फैमिली कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
डिवीजन बेंच में शामिल न्यायमूर्ति नानी टागिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की समीक्षा करते हुए कहा कि पति की ओर से लगाए गए आरोप बेहद सामान्य और अस्पष्ट थे।
अदालत ने कहा,
“याचिका में किसी विशेष तारीख, समय या स्थान का उल्लेख नहीं किया गया है, जहां कथित अवैध संबंध की घटना हुई हो।”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जिस व्यक्ति के साथ पत्नी के संबंध होने का आरोप लगाया गया, उसे मामले में पक्षकार भी नहीं बनाया गया।
पीठ ने कहा कि केवल गवाहों के सामान्य बयान पर्याप्त नहीं हैं, खासकर तब जब आरोपों का आधार स्पष्ट तथ्यों पर न हो। अदालत ने यह भी दोहराया कि किसी भी मुकदमे में पक्षकार अपने लिखित कथनों से आगे जाकर साक्ष्य पेश नहीं कर सकते।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि “बिना उचित वाद-विवाद के दिए गए साक्ष्य पर राहत नहीं दी जा सकती।”
हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी सिद्धांतों का सही मूल्यांकन किया था। अदालत ने कहा कि पति पत्नी के खिलाफ व्यभिचार या परित्याग का आरोप साबित करने में असफल रहे हैं।
इसके साथ ही अदालत ने अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट, सिवान के 12 जुलाई 2019 के फैसले को बरकरार रखा।
Case Details:
Case Title: Shyam Bihari Mishra v. Sanju Devi
Case Number: Miscellaneous Appeal No. 92 of 2020
Judges: Justice Nani Tagia and Justice Alok Kumar Pandey
Decision Date: May 4, 2026











