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पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नज़र, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क का निर्देश

ज्ञान प्रकाश अग्रवाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई को लेकर अहम आदेश दिया। याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने का निर्देश।

Vivek G.
पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नज़र, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक ऐसी याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें सालों से लंबित आपराधिक मामलों की एकसाथ सुनवाई और शीघ्र निपटारे की मांग उठी। अदालत कक्ष में माहौल गंभीर था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कई मामलों की सुनवाई वर्षों से अटकी हुई है, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।

यह मामला Supreme Court of India के समक्ष रिट याचिका (आपराधिक) के रूप में रखा गया था।

मामला क्या है

याचिकाकर्ता ज्ञान प्रकाश अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में यह रिट याचिका दायर कर आग्रह किया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित एक क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका (2020) को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

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इसके साथ ही, उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर कई अलग-अलग आवेदनों को एक साथ जोड़कर (क्लब करके) सुनवाई करने की मांग की। ये सभी आवेदन अलग-अलग वर्षों में दाखिल हुए थे, जिनमें कुछ तो एक दशक से भी अधिक समय से लंबित हैं।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि अलग-अलग बेंचों में बिखरे इन मामलों की वजह से सुनवाई टलती जा रही है और न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी हो गई है।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकीलों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना।

सुनवाई के दौरान पीठ ने साफ संकेत दिया कि मामलों की सूचीबद्धता और बेंच निर्धारण हाईकोर्ट के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है।

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पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा,

“यदि याचिकाकर्ता संबंधित नियमों के अनुसार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आवेदन करता है, तो उस पर विचार किया जाना अपेक्षित है।”

अदालत ने यह भी कहा कि मामलों की पुरानी लंबित स्थिति और न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को देखते हुए, प्रशासनिक स्तर पर संतुलन बनाना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीधा निर्देश देते हुए कहा कि वह अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष औपचारिक आवेदन दाखिल करे।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि-

“एक बार ऐसा आवेदन किया जाता है, तो यह अपेक्षा की जाती है कि मुख्य न्यायाधीश रोस्टर और पुराने लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाएंगे।”

इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष निर्देश जारी नहीं किया, बल्कि हाईकोर्ट की आंतरिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।

Case Title: Gyan Prakash Agarwal vs State of Uttar Pradesh & Anr.

Case No.: Writ Petition (Criminal) No. 522 of 2025

Decision Date: 07 January 2026

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