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जस्टिस GR स्वामीनाथन पर कथित आपत्तिजनक पुस्तक की रिलीज़ पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक

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Shivam Y.
जस्टिस GR स्वामीनाथन पर कथित आपत्तिजनक पुस्तक की रिलीज़ पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक

मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए जस्टिस के खिलाफ कथित व्यक्तिगत हमलों वाली एक पुस्तक के प्रकाशन, बिक्री और प्रसार पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और संस्थागत प्रतिष्ठा से जुड़ा है।

यह आदेश अधिवक्ता पी. नवीनप्रसाद द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें

“Thirupparankundran Affair: Is GRS a Judge or …” नामक पुस्तक को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पुस्तक का शीर्षक और कवर “अपमानजनक और derogatory” है और यह सीधे तौर पर Justice GR Swaminathan को निशाना बनाता है।

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मुख्य न्यायाधीश मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन न्यायाधीशों पर व्यक्तिगत हमले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आते। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा,

“यदि कोई आदेश से असंतुष्ट है, तो उसके लिए अपील का रास्ता है, न कि न्यायाधीश को बदनाम करना।”

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अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पुस्तक को Chennai Book Fair में बिक्री के लिए रखा जाना था, जिससे इसके सार्वजनिक प्रसार की आशंका थी।

मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से पुस्तक की रिलीज़, बिक्री और प्रसार पर रोक लगा दी, पुलिस को उपलब्ध प्रतियां जब्त करने का निर्देश दिया और प्रकाशक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की। साथ ही, अधिकारियों से कहा गया कि पुस्तक ऑनलाइन भी उपलब्ध न हो।

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