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आरक्षण नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी स्पष्टता: एयरपोर्ट अथॉरिटी केस में हाईकोर्ट का आदेश रद्द

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया बनाम शाम कृष्णा बी, सुप्रीम कोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी भर्ती मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि मेरिट से चयनित आरक्षित वर्ग उम्मीदवार सामान्य श्रेणी में गिने जाएंगे।

Vivek G.
आरक्षण नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी स्पष्टता: एयरपोर्ट अथॉरिटी केस में हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जुड़े एक अहम भर्ती विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में ही गिना जाएगा।

यह फैसला 16 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

साल 2013 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) के 245 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। इनमें-

  • 122 पद अनारक्षित
  • 78 ओबीसी
  • 22 एससी
  • 23 एसटी

भर्ती प्रक्रिया के बाद कुल 158 अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ता शाम कृष्ण बी. ने चयन न होने पर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी और बाद में केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

उनका तर्क था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को गलत तरीके से अनारक्षित श्रेणी में शामिल किया गया, जिससे उनका चयन प्रभावित हुआ।

High Court का फैसला

केरल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भर्ती प्रक्रिया में खामियां मानते हुए चयन सूची दोबारा बनाने का आदेश दिया।
बाद में डिवीजन बेंच ने भी आंशिक रूप से इस फैसले को सही ठहराते हुए निर्देश दिया कि-

  • चयन सूची दोबारा प्रकाशित की जाए
  • रोस्टर नियमों का सख्ती से पालन हो
  • याचिकाकर्ता को रिक्त पद पर नियुक्त किया जाए

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एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि-

“जो उम्मीदवार बिना किसी छूट के सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, वह सामान्य श्रेणी में ही माना जाएगा।”

वहीं याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि आरक्षण रोस्टर का सही पालन नहीं हुआ और इस वजह से उन्हें नुकसान हुआ।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा-

“अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के सामान्य वर्ग के बराबर या उससे अधिक अंक लाता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में ही गिना जाएगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि:

  • रोस्टर चयन प्रक्रिया के बाद लागू होता है
  • मेरिट के आधार पर चयन को बदला नहीं जा सकता
  • आरक्षण का उद्देश्य योग्य उम्मीदवार को बाहर करना नहीं है

कोर्ट ने पहले के फैसलों - इंद्रा साहनी, सौरव यादव और राजत यादव मामलों का भी हवाला दिया।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि-

  • केरल हाईकोर्ट का फैसला कानूनी रूप से गलत था
  • सभी 122 अनारक्षित पद मेरिट के आधार पर भरे जा चुके थे
  • याचिकाकर्ता की नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं बनता
  • एयरपोर्ट अथॉरिटी की चयन प्रक्रिया वैध थी

अदालत ने दोनों अपीलों पर फैसला सुनाते हुए कहा:

“हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया जाता है। चयन प्रक्रिया वैध थी और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।”

इसके साथ ही मामला समाप्त कर दिया गया।

Case Title: Airport Authority of India vs Sham Krishna B

Case No.: SLP (C) No. 10686 of 2020

Decision Date: 16 January 2026

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