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कानूनी लड़ाई में 'उलगनायगन': मद्रास हाईकोर्ट ने कमल हासन की पर्सनैलिटी राइट्स पर लगाई सख्त रोक

कमल हासन बनाम नी विदाई और अन्य, मद्रास हाई कोर्ट ने कमल हासन को अंतरिम राहत दी है, और AI से बनी तस्वीरों और उनके नाम और शक्ल के अनधिकृत कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

Vivek G.
कानूनी लड़ाई में 'उलगनायगन': मद्रास हाईकोर्ट ने कमल हासन की पर्सनैलिटी राइट्स पर लगाई सख्त रोक

चेन्नई की अदालत में सोमवार को एक अहम सुनवाई हुई, जहां दिग्गज अभिनेता और राज्यसभा सांसद Kamal Haasan ने अपनी पहचान, छवि और नाम के दुरुपयोग के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। सोशल मीडिया से लेकर बाज़ार में बिकने वाले कपड़ों तक-उनके नाम और तस्वीरों का कथित तौर पर बिना इजाज़त इस्तेमाल किया जा रहा था। अदालत ने इस पर अंतरिम राहत देते हुए साफ़ संदेश दिया कि पहचान की कीमत है और उसकी रक्षा होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

कमल हासन ने Madras High Court में ‘जॉन डो’ याचिका दाख़िल की थी-यानी ऐसे लोगों और प्लेटफ़ॉर्म्स के खिलाफ़, जिनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। अभिनेता ने शिकायत की कि चेन्नई की एक फर्म ‘नीये विदाई’ सहित कई अज्ञात इकाइयाँ उनके नाम ‘Kamal Haasan’, संक्षेप ‘KH’, उपनाम ‘उलगनायगन’, तस्वीरों और फिल्मों के संवादों को टी-शर्ट, शर्ट और अन्य उत्पादों पर छापकर बेच रही हैं-वह भी बिना सहमति।

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याचिका में यह भी कहा गया कि नई तकनीकों-जैसे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, जेनरेटिव एआई, डीपफेक और फेस मॉर्फ़िंग-के ज़रिये उनकी छवि को तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया जा रहा है, जिससे लोगों में यह भ्रम पैदा होता है कि मानो अभिनेता ने उन उत्पादों या सामग्री का समर्थन किया हो।

अदालत की टिप्पणी

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश Justice Senthilkumar Ramamoorthy ने प्रथम दृष्टया (prima facie) अभिनेता के पक्ष को मज़बूत पाया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से साफ़ है कि पहचान का व्यावसायिक दोहन किया गया है और यह रोक के दायरे में आता है।

अदालत ने आदेश में कहा,

“उपलब्ध तथ्यों के परीक्षण के बाद यह स्पष्ट है कि अंतरिम राहत देने के लिए मज़बूत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।”

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न्यायालय ने यह भी माना कि शिकायत दो स्तरों पर है-एक, बिना अनुमति कमाई के लिए नाम-छवि का इस्तेमाल; और दूसरा, एआई-जनित और मॉर्फ़ की गई ऐसी सामग्री, जो अभिनेता की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती है।

अदालत ने अगली सुनवाई तक प्रतिवादियों और अज्ञात इकाइयों को निर्देश दिया कि वे अभिनेता की झूठी, मॉर्फ़ की गई या एआई-जनित तस्वीरें किसी भी माध्यम से न बनाएं और न ही प्रसारित करें। साथ ही, उनकी तस्वीर, नाम या स्क्रीन नेम वाले किसी भी मर्चेंडाइज़ की बिक्री बिना सहमति के नहीं की जा सकेगी।

हालांकि, अदालत ने रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमा भी स्पष्ट की। आदेश में कहा गया,

“यह आदेश कैरिकेचर, व्यंग्य या अन्य वैध रचनात्मक अभिव्यक्तियों के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा।”

चूंकि मामला जॉन डो प्रकृति का है, अदालत ने आदेश का व्यापक प्रसार सुनिश्चित करने के लिए एक बड़े अंग्रेज़ी अख़बार में प्रकाशन का भी निर्देश दिया, ताकि अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं को सूचना मिल सके।

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अदालत का फैसला

अदालत ने कमल हासन के पक्ष में अंतरिम रोक लगाते हुए उनकी पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की और बिना सहमति किसी भी प्रकार के व्यावसायिक इस्तेमाल व भ्रामक डिजिटल सामग्री के प्रसार पर अगली सुनवाई तक प्रतिबंध लगाया।

Case Title: Kamal Haasan vs Neeye Vidai & Others

Case Type: Civil Suit – Personality Rights (John Doe)

Decision Date: January 12, 2026

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