कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विभाग में वरिष्ठ कर्मचारी को उसके जूनियर से कम वेतन मिल रहा है, तो “स्टेपिंग अप” यानी वेतन समानता का सिद्धांत लागू होगा। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की मांग खारिज कर दी गई थी।
यह मामला पल्लब कांती चट्टोपाध्याय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई 2 और 3 फरवरी 2026 को हुई और फैसला 3 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
Read also:- पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता पल्लब कांती चट्टोपाध्याय विभाग में जूनियर ड्राफ्ट्समैन के पद पर नियुक्त हुए थे। उनके साथ ही अमिताभ चक्रवर्ती भी नियुक्त हुए थे, जो उनसे कनिष्ठ थे। सेवा के विभिन्न चरणों में दोनों की पदोन्नति हुई और अंततः 24 जून 1988 को दोनों को सीधे भर्ती के माध्यम से फील्ड ऑफिसर बनाया गया।
विवाद तब खड़ा हुआ जब फील्ड ऑफिसर बनने के बाद जूनियर कर्मचारी को वरिष्ठ से अधिक वेतन तय कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए वेतन “स्टेपिंग अप” की मांग की, ताकि उनका वेतन भी जूनियर के बराबर हो सके।
CAT ने 2012 में यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि मामला समयसीमा से बाहर है और याचिकाकर्ता ने वरिष्ठता सूची दाखिल नहीं की।
अदालत की टिप्पणियां
मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान तुलनात्मक वेतन चार्ट का गहराई से परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि विभाग ने स्वयं इस तथ्य से इनकार नहीं किया कि याचिकाकर्ता अपने सहकर्मी से वरिष्ठ थे।
पीठ ने कहा, “जब यह स्वीकार्य स्थिति है कि याचिकाकर्ता वरिष्ठ थे और दोनों समान पद एवं वेतनमान में थे, तब जूनियर को अधिक वेतन देना और वरिष्ठ को उससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने 1982 में जूनियर को मिली एड-हॉक पदोन्नति को चुनौती नहीं दी थी। उनकी मांग केवल यह थी कि जब दोनों 1988 में समान पद पर आए, तब जूनियर को अधिक वेतन क्यों दिया गया।
पीठ ने कहा, “ट्रिब्यूनल यह समझने में विफल रहा कि विवाद 1988 की सीधी भर्ती से जुड़ा है, न कि 1982 की अस्थायी पदोन्नति से। इसलिए अधिकार क्षेत्र का सवाल उठाना गलत था।”
Read also:- मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को ज़हर देने का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने माता-पिता की उम्रकैद बरकरार रखी
वेतन निर्धारण पर कानूनी सिद्धांत
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Commissioner & Secretary to Govt. of Haryana vs. Ram Sarup Ganda (2011) का उल्लेख करते हुए कहा कि “स्टेपिंग अप” का सिद्धांत तब लागू होता है जब वरिष्ठ और कनिष्ठ एक ही पद, एक ही कैडर और समान वेतनमान में हों, और कनिष्ठ को अधिक वेतन मिल रहा हो।
यह पाया गया कि जूनियर कर्मचारी को उसके पुराने एड-हॉक कार्यकाल के आधार पर अधिक वेतन का लाभ दिया गया था, जबकि वह लाभ उसकी मूल पोस्ट पर लौटने के बाद संरक्षित नहीं रहना चाहिए था।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “जूनियर रिसर्च असिस्टेंट के पद पर पूर्व में मिला वेतन, बाद में मूल पद पर वापसी के बाद संरक्षित नहीं किया जा सकता था।”
Read also:- पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द
अदालत का निर्णय
खंडपीठ ने CAT का 27 नवंबर 2012 का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का वेतन फील्ड ऑफिसर के पद पर उसी तिथि से जूनियर के बराबर किया जाए, जिस दिन जूनियर को अधिक वेतन मिला था।
साथ ही, सभी परिणामी लाभ-जैसे बकाया वेतन और अन्य वित्तीय लाभ-भी दिए जाएं। विभाग को यह पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया।
अंत में अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि वरिष्ठ कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
Case Title: Pallab Kanti Chattopadhyay vs Union of India & Ors.
Case No.: C.O.C.T. 2 of 2013
Case Type: Civil Revisional Jurisdiction (Writ Petition)
Decision Date: 03 February 2026










