दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को लंबी सुनवाई के बाद एक अहम फैसला आया। मामला पंजाब के संगूर जिले में प्रस्तावित सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट से जुड़ा था। किसानों और एक स्कूल ने आरोप लगाया था कि कृषि ज़ोन में उद्योग लगाने की अनुमति कानून के खिलाफ दी गई।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा - “मास्टर प्लान कोई औपचारिक कागज़ नहीं, यह कानूनन बाध्यकारी दस्तावेज है। इसे दरकिनार कर विकास की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
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मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता हरबिंदर सिंह सेखों और अन्य किसान संगूर के आसपास रहते हैं। उनका कहना था कि करीब 47.82 एकड़ जमीन पर सीमेंट यूनिट स्थापित करने के लिए 13 दिसंबर 2021 को ‘चेंज ऑफ लैंड यूज़’ (CLU) दे दी गई, जबकि वह क्षेत्र मास्टर प्लान के अनुसार ग्रामीण कृषि ज़ोन में आता है।
पास ही स्थित वसंत वैली पब्लिक स्कूल ने भी याचिका दाखिल की। स्कूल का तर्क था कि उद्योग से निकलने वाला धूल और प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 फरवरी 2024 को दोनों याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाईकोर्ट ने माना कि CLU जारी करते समय कानूनी कमी थी, लेकिन 5 जनवरी 2022 को हुई प्लानिंग बोर्ड की 43वीं बैठक में मिली मंजूरी से वह कमी दूर हो गई।
इसी फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई।
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कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान पीठ ने पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 (PRTPD Act) के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की।
पीठ ने कहा, “जब कोई मास्टर प्लान राजपत्र में प्रकाशित हो जाता है, तो वह बाध्यकारी हो जाता है। उसके खिलाफ किसी भूमि उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक कि कानून के अनुसार संशोधन न हो।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 79 और 80 के तहत विकास कार्य केवल मास्टर प्लान के अनुरूप ही हो सकता है। CLU एक नियामक अनुमति है, मास्टर प्लान को बदलने का साधन नहीं।
पीठ ने टिप्पणी की, “अगर अनुमति देते समय वह कानून के अनुरूप नहीं थी, तो बाद की मंजूरी से उसे वैध नहीं बनाया जा सकता। अनुमति उसी दिन वैध होनी चाहिए, जिस दिन दी गई।”
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प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर सवाल
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 5 जनवरी 2022 को प्लानिंग बोर्ड की 43वीं बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी, जिससे CLU को कानूनी आधार मिल गया।
लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
न्यायालय ने कहा कि मास्टर प्लान में बदलाव के लिए वही प्रक्रिया अपनानी होती है जो मूल प्लान के लिए तय है - यानी सार्वजनिक सूचना, आपत्तियों पर विचार और राजपत्र में प्रकाशन।
“सिर्फ बैठक की कार्यवाही या आंतरिक स्वीकृति से मास्टर प्लान नहीं बदला जा सकता,” पीठ ने कहा।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2 सितंबर 1998 की अधिसूचना के अनुसार, सीमेंट यूनिट और स्कूल या रिहायशी क्षेत्र के बीच न्यूनतम दूरी होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी और सिटिंग नॉर्म्स अलग कानूनी परत हैं। लेकिन अगर भूमि उपयोग ही अवैध है, तो बाकी मंजूरियों का सवाल बाद में आता है।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि 13 दिसंबर 2021 को दी गई CLU कानून के अनुरूप नहीं थी, क्योंकि उस समय मास्टर प्लान में उस भूमि पर उद्योग की अनुमति नहीं थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि 5 जनवरी 2022 की बैठक में दी गई मंजूरी से पहले की अवैधता दूर नहीं होती।
अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का 29 फरवरी 2024 का फैसला रद्द करते हुए CLU को अवैध घोषित कर दिया।
Case Title: Harbinder Singh Sekhon & Ors. vs State of Punjab & Ors.
Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8316 of 2024 & connected matters
Decision Date: February 3, 2026










