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BOCW Cess पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को झटका, ठेकेदारों को राहत

प्रकाश अटलांटा (जेवी) बनाम एनएचएआई और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने BOCW सेस पर बड़ा फैसला सुनाया। NHAI से जुड़े मामलों में कहा गया कि बाद में लागू कानून से ठेकेदारों पर बोझ नहीं डाला जा सकता।

Vivek G.
BOCW Cess पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को झटका, ठेकेदारों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (BOCW) एक्ट और उससे जुड़ा सेस कानून हर हाल में पुराने ठेकों पर लागू नहीं किया जा सकता। यह फैसला NHAI बनाम कई निर्माण कंपनियों से जुड़े मामलों में आया है, जिसमें करोड़ों रुपये के सेस की वसूली को लेकर विवाद था।

कोर्ट ने कहा कि जब तक राज्यों में वेलफेयर बोर्ड और नियम प्रभावी रूप से लागू नहीं हुए, तब तक ठेकेदारों से सेस वसूली को “बाद का कानून” (Subsequent Legislation) माना जाएगा।

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केस की पृष्ठभूमि

यह मामला प्रकाश अटलांटा (JV) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) सहित कई कंपनियों से जुड़ा था।

NHAI ने हाईवे प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले ठेकेदारों से 1% BOCW सेस काटा था।
लेकिन ठेकेदारों का कहना था कि -

  • जब उन्होंने बोली (bid) लगाई थी,
  • तब राज्य में न तो वेलफेयर बोर्ड बना था
  • और न ही BOCW नियम लागू थे

इसलिए यह सेस बाद में लागू हुआ कानून है और इसका बोझ ठेकेदारों पर नहीं डाला जा सकता।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (न्यायमूर्ति संजय कुमार) ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा:

“जब तक राज्य सरकारों ने वेलफेयर बोर्ड का गठन नहीं किया और सेस वसूली की व्यवस्था लागू नहीं की, तब तक BOCW कानून केवल कागज़ पर था।”

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कोर्ट ने यह भी कहा कि -

  • कानून भले 1996 में बन गया हो
  • लेकिन ज़्यादातर राज्यों में इसका वास्तविक क्रियान्वयन कई साल बाद हुआ
  • ऐसे में ठेकेदारों को पहले से इसका भार उठाने को मजबूर नहीं किया जा सकता

एक अहम टिप्पणी में अदालत ने कहा:

“कानून तभी प्रभावी माना जाएगा जब उसे लागू करने की व्यवस्था जमीन पर मौजूद हो।”

अनुबंध और ‘Subsequent Legislation’ का मुद्दा

कोर्ट ने यह भी देखा कि NHAI के अनुबंधों में एक क्लॉज था - Clause 70.8 (Subsequent Legislation)

इसके अनुसार, यदि बोली की तारीख के बाद कोई नया कानून लागू होता है जिससे लागत बढ़े, तो उसका भार ठेकेदार पर नहीं डाला जा सकता।

कोर्ट ने माना कि:

  • BOCW एक्ट का व्यावहारिक लागू होना
  • वेलफेयर बोर्ड का गठन
  • और सेस की वसूली की शुरुआत

ये सभी बाद की घटनाएं थीं, इसलिए इन्हें “Subsequent Legislation” माना जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने:

  • NHAI की सभी अपीलें खारिज कर दीं
  • ठेकेदारों के पक्ष में दिए गए मध्यस्थता (Arbitration) अवॉर्ड को बरकरार रखा
  • यह स्पष्ट किया कि -

“राज्य सरकारों की लापरवाही का बोझ ठेकेदारों पर नहीं डाला जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक कानून को लागू करने की व्यवस्था मौजूद न हो, तब तक उससे जुड़ा आर्थिक दायित्व थोपना गलत है।

Case Title: Prakash Atlanta (JV) vs NHAI & Ors.

Case No.: Civil Appeal Nos. 4513, 5301–5304, 5412, 5416 of 2025

Decision Date: 20-Jan-2026

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