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दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षिका की विधवा को कोविड ड्यूटी मुआवज़ा दिलाने का आदेश दिया, सरकार का इनकार खारिज

गिरिजा देवी बनाम दिल्ली सरकार अपने मुख्य सचिव एवं अन्य के माध्यम से - दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को शिक्षक की विधवा को 1 करोड़ रुपये की कोविड अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया, तथा उनके मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया।

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षिका की विधवा को कोविड ड्यूटी मुआवज़ा दिलाने का आदेश दिया, सरकार का इनकार खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि वह एमसीडी स्कूल के दिवंगत प्रिंसिपल शिवनाथ प्रसाद की पत्नी गिरिजा देवी को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा अदा करे। अदालत ने माना कि अप्रैल 2021 में कोविड-19 से निधन के समय प्रसाद वास्तव में कोविड संबंधी ड्यूटी निभा रहे थे।

पृष्ठभूमि

प्रसाद ने 1993 में दिल्ली सरकार में सहायक शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की थी और महामारी के दौरान निथारी स्थित एमसीडी प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल थे। 25 मार्च 2020 को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा हुई थी और जल्द ही दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने एक योजना लागू की, जिसके तहत कोविड ड्यूटी पर कार्यरत कर्मचारी की मौत होने पर उसके परिवार को एक करोड़ रुपये दिए जाने थे।

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गिरिजा देवी ने यह राहत मांगी थी जब उनके पति की 24 अप्रैल 2021 को रिपोर्ट पॉज़िटिव आई और चार दिन बाद पीतमपुरा के नवजीवन अस्पताल में उनका निधन हो गया। लेकिन दिसंबर 2021 में उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। अधिकारियों का कहना था कि प्रसाद “साधारण ड्यूटी” पर थे, कोविड ड्यूटी पर नहीं।

अदालत की टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ मिलकर अलग दृष्टिकोण अपनाया। जजों ने कहा कि महामारी के समय प्रिंसिपल की भूमिका को सीमित तरीके से नहीं देखा जा सकता।

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"संस्थान का प्रमुख, जो टीकाकरण जैसी कोविड ड्यूटी की निगरानी कर रहा था और रोज़ाना संक्रमण के खतरे का सामना कर रहा था, उसे कोविड ड्यूटी की परिभाषा से बाहर नहीं रखा जा सकता," अदालत ने टिप्पणी की।

पीठ ने यह भी कहा कि जिस स्कूल में कोविड टीकाकरण का कार्य चल रहा था, वहाँ प्रिंसिपल का दायित्व केवल आदेश देने तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी मौजूदगी भी आवश्यक थी।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा,

"यह मान लेना अव्यावहारिक होगा कि प्रिंसिपल दूसरों को कोविड ड्यूटी सौंपें लेकिन स्वयं किसी खतरे से दो-चार न हों।"

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निर्णय

अदालत ने नवंबर 2024 के एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विधवा की याचिका खारिज कर दी गई थी। दिल्ली सरकार को आठ हफ़्तों के भीतर मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया है। यह भी साफ कर दिया गया कि देरी होने पर 6% वार्षिक ब्याज देना होगा।

इस आदेश के साथ, अदालत ने राहत बहाल करते हुए स्पष्ट कर दिया कि महामारी जैसी आपदा में बने कल्याणकारी योजनाओं को उदार दृष्टिकोण से लागू किया जाना चाहिए।

फैसले से गिरिजा देवी का एक करोड़ रुपये का हक़ अब मान्य हो गया है।

केस का शीर्षक: गिरिजा देवी बनाम दिल्ली सरकार, अपने मुख्य सचिव एवं अन्य के माध्यम से।

केस संख्या: LPA 45/2025 & CM APPL. 3201/2025

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