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पटना हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षिका की पेंशन बहाल की, शिक्षा विभाग का आदेश किया खारिज

उर्मिला कुमारी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य - पटना उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन बहाल की, तथा बिहार शिक्षा विभाग द्वारा नियम 43(बी) के तहत अवैध रूप से लाभ रोके जाने का फैसला सुनाया।

Shivam Y.
पटना हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षिका की पेंशन बहाल की, शिक्षा विभाग का आदेश किया खारिज

पटना हाईकोर्ट ने एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षिका के पक्ष में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बिहार शिक्षा विभाग का उनका पूरा पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ रोकने का फैसला अवैध है। न्यायमूर्ति नानी टैगिया ने 4 सितंबर 2025 को मौखिक निर्णय सुनाते हुए याचिकाकर्ता उर्मिला कुमारी, पूर्व सहायक क्राफ्ट शिक्षिका, की पेंशन तुरंत बहाल करने और बकाया राशि चुकाने का निर्देश दिया।

पृष्ठभूमि

मामला 1980 के दशक के आखिर का है जब कुमारी को पटना के एक सरकारी कन्या विद्यालय में सहायक क्राफ्ट शिक्षिका नियुक्त किया गया था। कई सालों बाद, 2016 में, उनकी नियुक्ति को "नियुक्ति के समय उम्र अधिक होने" के आधार पर अनियमित बताया गया। अन्य कई बर्खास्त शिक्षकों की तरह उन्होंने भी राहत पाई, जब 2017 में हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द कर दी और राज्य सरकार को निष्पक्ष सुनवाई के बाद नया आदेश पारित करने की छूट दी।

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2017 में उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। हालांकि जनवरी 2018 में वे सेवानिवृत्त हो गईं, जांच को बिहार पेंशन नियमावली, 1950 की धारा 43(ख) के तहत जारी रखा गया, जो सेवानिवृत्ति के बाद भी कथित कदाचार पर कार्रवाई की अनुमति देता है। अंततः जुलाई 2021 में क्षेत्रीय उपनिदेशक, शिक्षा, ने आदेश पारित कर उनकी 100% पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश नकदीकरण रोक दिया।

अदालत की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने दलील दी कि धारा 43(ख) का दायरा सीमित है—इसे केवल उन मामलों में लागू किया जा सकता है जिनकी घटनाएँ कार्यवाही शुरू होने से चार साल से अधिक पुरानी न हों। चूँकि आरोप 1989 की नियुक्ति से जुड़े थे, पूरी जांच ही आधारहीन हो जाती है।

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पीठ ने एक समान मामला - एलपीए संख्या 866/2024 (गीता कुमारी बनाम बिहार राज्य) - का हवाला दिया, जिसमें हाईकोर्ट पहले ही कह चुका था कि दशकों पुरानी घटनाओं पर धारा 43(ख) के तहत पेंशन रोकना अवैध है।

न्यायमूर्ति टैगिया ने टिप्पणी की, "वर्तमान रिट याचिका में उठाया गया मुद्दा, एलपीए संख्या 866/2024 में दिए गए निर्णय से पूरी तरह आच्छादित है।"

राज्य सरकार के वकील ने भी स्वीकार किया कि पहले के फैसले के बाद अब अलग रुख की गुंजाइश नहीं बचती।

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फैसला

अदालत ने 12 जुलाई 2021 का शिक्षा विभाग का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि कुमारी को "सेवा से सेवानिवृत्त मानी जाएँगी" और उन्हें पेंशन संबंधी सभी अधिकार मिलेंगे। विभाग को छह माह के भीतर पेंशन का बकाया चुकाने का निर्देश दिया गया है। यदि भुगतान में देरी हुई तो बकाया राशि पर 5% ब्याज देना होगा।

इसके साथ ही रिट याचिका स्वीकार कर निस्तारित कर दी गई।

केस का शीर्षक: उर्मिला कुमारी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य

केस संख्या: सिविल रिट क्षेत्राधिकार केस संख्या 3871/2022

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