गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी, विशेषकर पुलिसकर्मी, भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया जाता है, तो उसे सेवा से हटाने से पहले शो-कॉज नोटिस देना आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत स्वतः लागू नहीं होते।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला पियूषभाई भगवतभाई गामित बनाम गुजरात राज्य से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता एक पुलिस कांस्टेबल था। उसकी नियुक्ति वर्ष 2001 में हुई थी।
साल 2010 में उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी केस दर्ज हुआ। बाद में ट्रायल कोर्ट ने 30 अप्रैल 2019 को उसे दोषी करार दिया।
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इसके बाद विभाग ने 19 जुलाई 2019 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। अपील और पुनरीक्षण भी खारिज हो गए, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:
- उसे बर्खास्त करने से पहले कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया
- यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है
- दोषसिद्धि के बावजूद सुनवाई का अवसर देना आवश्यक था
वकील ने दलील दी कि बिना सुनवाई के सेवा समाप्त करना अवैध है।
राज्य की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया:
- दोषसिद्धि के बाद सेवा में बनाए रखना उचित नहीं
- संविधान के अनुच्छेद 311(2) के दूसरे प्रावधान के तहत नोटिस देना जरूरी नहीं
- ऐसे मामलों में शो-कॉज नोटिस देना “खाली औपचारिकता” (empty formality) होगा
राज्य ने जोर दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कठोर रुख अपनाना आवश्यक है।
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न्यायमूर्ति मौलिक जे. शेलत ने विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा:
“जब किसी सरकारी कर्मचारी की आपराधिक दोषसिद्धि हो चुकी हो, तो अनुच्छेद 311(2) का दूसरा प्रावधान लागू होता है और ऐसी स्थिति में पूर्व सुनवाई की आवश्यकता नहीं रहती।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- संविधान स्वयं ऐसे मामलों में सुनवाई के अधिकार को सीमित करता है
- अनुशासनात्मक प्राधिकारी को केवल यह देखना होता है कि दोषसिद्धि गंभीर है या नहीं
- यदि अपराध गंभीर है, तो सीधे बर्खास्तगी उचित है
साथ ही, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के तुलसीराम पटेल फैसले पर भरोसा करते हुए कहा कि:
“इस प्रकार के मामलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को लागू नहीं किया जा सकता।”
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अदालत ने पाया कि:
- याचिकाकर्ता भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था
- विभाग ने सभी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया था
- बर्खास्तगी आदेश कानून के अनुसार था
अंततः कोर्ट ने कहा:
“ऐसे मामलों में शो-कॉज नोटिस देना आवश्यक नहीं है और बर्खास्तगी आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।”
इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया और नियम समाप्त कर दिया गया।
Case Title: Piyushbhai Bhagvatbhai Gamit vs State of Gujarat & Ors.
Case Number: R/Special Civil Application No. 7162 of 2022
Judge: Justice Maulik J. Shelat
Decision Date: 20 March 2026










