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काला जादू और अंधविश्वास पर सख्ती की मांग: केरल हाईकोर्ट ने सरकार से विशेष सेल बनाने को कहा

केरल युक्ति वधि संगम बनाम भारत संघ और अन्य - केरल उच्च न्यायालय ने अंधविश्वास विरोधी कानून में देरी पर चिंता जताई, काला जादू और टोना-टोटका से संबंधित शिकायतों से निपटने के लिए विशेष पुलिस प्रकोष्ठ का सुझाव दिया।

Shivam Y.
काला जादू और अंधविश्वास पर सख्ती की मांग: केरल हाईकोर्ट ने सरकार से विशेष सेल बनाने को कहा

काला जादू, टोना-टोटका और अमानवीय प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने माना कि भले ही कानून बनाना सरकार का विशेषाधिकार है, लेकिन वर्षों से केवल विचार और समितियों तक सीमित रहना चिंता का विषय है। इसी पृष्ठभूमि में कोर्ट ने अंतरिम कदम के तौर पर एक विशेष सेल बनाने पर विचार करने का सुझाव दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका केरल युक्ति वादी संगम नामक एक पंजीकृत सांस्कृतिक संगठन ने दायर की थी, जो तर्कवाद, मानववाद और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का कार्य करता है। संगठन ने अदालत को बताया कि राज्य में काला जादू और अंधविश्वास के नाम पर शोषण और हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं।

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याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले ही ऐसे कृत्यों पर रोक लगाने के लिए विशेष कानून बनाए जा चुके हैं, जबकि केरल में अब तक कोई स्पष्ट कानून लागू नहीं हुआ है।

सरकार का रुख

अदालत के समक्ष दायर हलफनामों में, राज्य ने भारतीय न्याय संहिता, 2023, ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, केरल पुलिस अधिनियम और अन्य विशेष कानूनों जैसे कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और POCSO के प्रावधानों पर भरोसा किया।

सरकार ने यह भी खुलासा किया कि न्यायमूर्ति के.टी. थॉमस की अध्यक्षता वाली विधि सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर केरल अमानवीय कुकर्म, जादू टोना और काला जादू निवारण विधेयक, 2022 का मसौदा तैयार किया गया था। हालांकि, मंत्रिपरिषद ने जुलाई 2023 में उस चरण में विधेयक पर आगे न बढ़ने का निर्णय लिया।

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बाद में, राज्य ने इस मुद्दे की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। अदालत को सूचित किया गया कि समिति कई बैठकें कर चुकी है और संबंधित पक्षों से और परामर्श की आवश्यकता है।

अदालत की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश नितिन जमदार और न्यायमूर्ति स्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने साफ कहा कि अदालत सीधे तौर पर सरकार को कानून बनाने का आदेश नहीं दे सकती।
हालांकि, पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि संविधान का अनुच्छेद 51A(h) हर नागरिक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का दायित्व देता है।
अदालत ने टिप्पणी की,

“लगभग चार वर्षों से राज्य न तो कानून बनाने से स्पष्ट इनकार कर रहा है और न ही इसे अंतिम रूप दे पा रहा है। केवल परामर्श और समितियों की प्रक्रिया चलती आ रही है।”

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विशेष सेल का सुझाव

अदालत ने माना कि मौजूदा कानूनों के बावजूद, काला जादू और अमानवीय प्रथाओं से जुड़े मामलों के लिए एक समर्पित व्यवस्था जरूरी है।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसे मामलों की शिकायतों से निपटने के लिए एक विशेष सेल स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।
अदालत के अनुसार,

“इस तरह की व्यवस्था कम से कम यह दिखाएगी कि राज्य सरकार इन अमानवीय प्रथाओं को लेकर गंभीर है।”

अंतिम निर्णय

राज्य सरकार की ओर से उपस्थित राज्य अटॉर्नी ने अदालत को बताया कि इस आदेश को मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा और उचित कदमों पर विचार किया जाएगा।

इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए आदेश पारित किया।

Case Title: Kerala Yukthi Vadhi Sangam v. Union of India & Others

Case Number: WP(C) No. 33093 of 2022

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