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कर्नाटक हाईकोर्ट ने मल्टीप्लेक्स मालिकों और निर्माताओं की आपत्तियों के बाद ₹200 मूवी टिकट सीमा पर लगाई रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने नई ₹200 मूवी टिकट सीमा पर रोक लगाई, मल्टीप्लेक्स को राहत, कानूनी लड़ाई जारी।

Vivek G.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मल्टीप्लेक्स मालिकों और निर्माताओं की आपत्तियों के बाद ₹200 मूवी टिकट सीमा पर लगाई रोक

बेंगलुरु, 23 सितंबर- वकीलों और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों से भरी अदालत में मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस नए नियम पर अस्थायी रोक लगा दी, जिसमें सिनेमा टिकट की अधिकतम कीमत ₹200 तय की गई थी। यह अंतरिम आदेश तब आया जब मल्टीप्लेक्स संचालकों, फिल्म निर्माताओं और कई वरिष्ठ वकीलों ने सरकार की इस पहल का कड़ा विरोध किया।

पृष्ठभूमि

राज्य सरकार ने इस साल की शुरुआत में कर्नाटक सिनेमा (नियमन) नियमों में संशोधन कर सभी सिनेमा घरों, मल्टीप्लेक्स सहित, के लिए अधिकतम टिकट दर ₹200 तय कर दी थी। मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MAI), पीवीआर इनॉक्स के एक शेयरधारक और प्रोडक्शन हाउस होम्बले फिल्म्स सहित कई याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह संशोधन कानून के मूल उद्देश्य से परे है, जो मुख्यतः थिएटरों के लाइसेंस और निर्माण से जुड़ा है, न कि टिकट मूल्य निर्धारण से।

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याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि आईमैक्स, 4DX या लग्ज़री सीटों जैसे प्रीमियम प्रारूप चलाने की लागत एकल स्क्रीन थिएटरों से कहीं अधिक होती है, फिर भी सरकार ने सभी को एक ही तरह से बांध दिया। उनके संयुक्त निवेदन में कहा गया, “निवेश या तकनीक की परवाह किए बिना लगाया गया यह समान सीमा स्पष्ट रूप से मनमाना है।”

अदालत की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने ध्यान से दलीलें सुनीं जब एमएआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता उदय होल्ला ने जोर दिया कि दर्शकों को प्रीमियम अनुभव के लिए भुगतान करने का विकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर दर्शक आराम या अत्याधुनिक स्क्रीन के लिए ज्यादा पैसे देना चाहें तो राज्य को रोकने का अधिकार नहीं है,” यह भी याद दिलाया कि इसी तरह की एक सीमा कुछ साल पहले कोर्ट की चुनौती के बाद हटा दी गई थी।

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होम्बले फिल्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्यान चिन्नप्पा ने राज्य की अधिकारिता पर ही सवाल उठाया। उनका कहना था कि “मूल्य निर्धारण थिएटर मालिकों और ग्राहकों के बीच का विषय है,” और निर्माता भारी निवेश वसूलने के लिए उचित टिकट दरों पर निर्भर करते हैं।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता इस्माइल जाबीउल्ला ने पलटवार करते हुए कहा कि यह संशोधन जनहित और संविधान में निहित सामाजिक कल्याण के सिद्धांतों के तहत किया गया है। सरकार का मानना है कि कीमत पर नियंत्रण से आम दर्शकों को राहत मिलेगी और सिनेमाघर सभी के लिए सुलभ रहेंगे।

निर्णय

दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पीठ ने नए नियम पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने आदेश दिया, “अगली सुनवाई तक ₹200 की टिकट सीमा से संबंधित संशोधन का संचालन स्थगित रहेगा,” जिससे फिलहाल थिएटर अपने टिकट मूल्य खुद तय कर सकेंगे। अब यह मामला विस्तृत सुनवाई के लिए आने वाले हफ्तों में फिर अदालत के सामने रखा जाएगा, और फिल्म प्रेमियों से लेकर सिनेमा मालिकों तक सभी अगली कड़ी का इंतजार कर रहे हैं।

मामले का शीर्षक: मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया एवं अन्य बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य

याचिकाकर्ता: मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MAI), PVR INOX के शेयरधारक, होम्बले फिल्म्स, कीस्टोन एंटरटेनमेंट्स

प्रतिवादी: कर्नाटक राज्य

आदेश की तिथि: 23 सितंबर, 2025

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