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₹47 करोड़ मुआवजा न देने पर केरल हाई सख्त कोर्ट, राज्य की ट्रेजरी अटैच करने की चेतावनी

केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित मुआवजा कोष और मध्यस्थ शुल्क के तहत देय 47 करोड़ रुपये एक सप्ताह के भीतर जारी नहीं किए गए तो उसके खजाने को जब्त किया जा सकता है। - स्वतः संज्ञान बनाम केरल राज्य और अन्य एवं संबंधित मामला

Shivam Y.
₹47 करोड़ मुआवजा न देने पर केरल हाई सख्त कोर्ट, राज्य की ट्रेजरी अटैच करने की चेतावनी

केरल हाई ने सोमवार को राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पीड़ित मुआवजा फंड और मध्यस्थों के बकाया भुगतान समय पर जारी नहीं किए गए तो अदालत राज्य के ट्रेजरी खातों को अटैच करने का आदेश दे सकती है।

मुख्य मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह सुनवाई मध्यस्थता केंद्रों के बुनियादी ढांचे और लंबित भुगतानों से जुड़े दो मामलों के संदर्भ में हो रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हाई कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई याचिका से जुड़ा है, जिसमें राज्य के मध्यस्थता केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं, कर्मचारियों की कमी और नियमित कार्यालय संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई थी।

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सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि राज्य में पीड़ित मुआवजा फंड और मध्यस्थों के मानदेय का भुगतान लंबे समय से लंबित है। पिछले सप्ताह अदालत ने इस देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य के गृह सचिव को तलब किया था।

सोमवार की सुनवाई में गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत को बताया कि पीड़ित मुआवजा योजना का प्रशासन गृह विभाग देखता है, लेकिन धन जारी करने का अधिकार वित्त विभाग के पास है।

अदालत को बताया गया कि लगभग ₹47 करोड़ की राशि पीड़ितों को मुआवजे के रूप में अभी तक जारी नहीं की गई है, जबकि करीब ₹10 करोड़ मध्यस्थों के मानदेय के रूप में बकाया है।

इस पर कोर्ट ने वित्त विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और पूछा कि भुगतान में इतनी देरी क्यों हो रही है।

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सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार की दलीलों पर कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने कहा:

“आपकी जिम्मेदारी थी कि वैधानिक भुगतान समय पर किया जाए। हम नियमों की व्याख्या सुनने के लिए यहां नहीं बैठे हैं, हमें यह जानना है कि पैसा अभी तक क्यों नहीं दिया गया।”

न्यायमूर्ति स्याम कुमार वी.एम. ने भी स्पष्ट किया कि पीड़ित मुआवजा देना राज्य की जिम्मेदारी है।

“अगर दान या अन्य स्रोतों से पैसा नहीं आता है, तो राज्य को अपने बजट से यह राशि उपलब्ध करानी होगी। पीड़ित मुआवजा राज्य की जिम्मेदारी है।”

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अदालत ने यह भी नाराजगी जताई कि एक महत्वपूर्ण बैठक में, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे, वहां सरकार की ओर से ऐसा अधिकारी भेजा गया जो कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था।

अदालत ने वित्त विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और भुगतान में देरी के कारण स्पष्ट करने को कहा।

साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर पीड़ित मुआवजा और मध्यस्थों का बकाया भुगतान जारी नहीं किया गया, तो राज्य सरकार के ट्रेजरी खातों को अटैच करने का आदेश दिया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की गई है।

Case Title: Suo Motu v. State of Kerala and Ors. & Connected Matter

Case Number: WP(C) 42844/2025 and WP(C) 48551/2025

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