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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अभिनेत्री प्रत्युषा की मौत पर सच्चाई साफ, सिद्धार्थ रेड्डी दोषी ठहराए गए

गुडीपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी बनाम राज्य सी.बी.आई., सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री प्रत्युषा की मौत मामले में सिद्धार्थ रेड्डी की सजा बरकरार रखी, कहा– मौत ज़हर से हुई, हत्या नहीं।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अभिनेत्री प्रत्युषा की मौत पर सच्चाई साफ, सिद्धार्थ रेड्डी दोषी ठहराए गए

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की अदालत में जब यह मामला सुना गया, तो वर्षों पुरानी एक चर्चित मौत की परतें फिर से खुलीं। अभिनेत्री प्रत्युषा की 2002 में हुई मौत को लेकर तरह-तरह के सवाल उठे थे-क्या यह हत्या थी? क्या यौन उत्पीड़न हुआ था? या फिर यह आत्महत्या का मामला था?

आख़िरकार, सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत साक्ष्यों और विशेषज्ञ रिपोर्टों के आधार पर तस्वीर साफ कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रत्युषा दक्षिण भारत की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। उनका संबंध इंजीनियरिंग छात्र सिद्धार्थ रेड्डी से था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन सिद्धार्थ के परिवार को यह रिश्ता मंज़ूर नहीं था।

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23 फरवरी 2002 की शाम दोनों ने ज़हर खा लिया। उन्हें हैदराबाद के केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रत्युषा की अगले दिन मौत हो गई, जबकि सिद्धार्थ बच गए।

शुरुआत में मामला आत्महत्या का माना गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने विवाद खड़ा कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठे सवाल

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने कहा कि मौत “गला दबाने से” हुई है और यौन हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मीडिया को इंटरव्यू भी दे दिया।

लेकिन आंध्र प्रदेश फॉरेंसिक साइंस लैब और बाद में बनी विशेषज्ञ समिति ने यह निष्कर्ष निकाला कि मौत ऑर्गेनोफॉस्फेट ज़हर (कीटनाशक) से हुई थी।

एआईIMS की समिति ने भी साफ कहा कि गले और शरीर पर जो निशान थे, वे इलाज के दौरान लगे थे, न कि किसी हमले के। रिपोर्ट में कहा गया: “The cause of death of the deceased Miss S. Pratyusha was Organophosphorus poisoning. (मृतक मिस एस. प्रत्यूषा की मौत का कारण ऑर्गनोफॉस्फोरस पॉइज़निंग था।)”

सीबीआई की जांच में भी यही सामने आया कि यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला।

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सीबीआई की जांच और अदालत की सुनवाई

हाई कोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया। जांच में पाया गया कि:

  • दोनों ने साथ में कीटनाशक खरीदा।
  • अस्पताल पहुंचने पर प्रत्युषा ने खुद डॉक्टर को बताया कि उन्होंने ज़हर खाया है।
  • फॉरेंसिक रिपोर्ट में शरीर में कीटनाशक मिला।
  • यौन उत्पीड़न का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला।

सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि यह आत्महत्या का मामला था और सिद्धार्थ ने इसमें सहायता की थी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मेडिकल साक्ष्यों और विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्टों का गहराई से विश्लेषण किया।

पीठ ने कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने इलाज के दौरान लगे निशानों को गलत तरीके से “हिंसा के निशान” मान लिया।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि प्रत्युषा की हत्या की गई या उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ।

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अंतिम निर्णय

ट्रायल कोर्ट ने सिद्धार्थ रेड्डी को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया था। हाई कोर्ट ने सजा कम करते हुए दो साल कर दी थी और जुर्माना बढ़ा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि प्रत्युषा ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या की। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि सिद्धार्थ ने कीटनाशक खरीदने और साथ देने के माध्यम से आत्महत्या में भूमिका निभाई।

अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा और मामले का पटाक्षेप कर दिया।

Case Title: Gudipalli Siddhartha Reddy vs State C.B.I.

Case No.: Criminal Appeal No. 457 of 2012 (with 894-895/2012)

Decision Date: February 18, 2026

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