सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में लंबे समय से जेल में बंद कैदी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर कोई दोषी तय अवधि पूरी कर चुका है, तो उसकी समय से पहले रिहाई (Premature Release) पर प्रशासन को खुद पहल करनी चाहिए। यह टिप्पणी बिहार के एक पुराने आपराधिक मामले में की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला बुटन साहू बनाम राज्य सरकार (बिहार) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने पटना हाईकोर्ट के 10 मई 2019 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका विशेष अनुमति याचिका (SLP) के रूप में दाखिल की गई थी, जिसमें देरी से याचिका दायर होने को भी माफ करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी अब तक 13 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है, और वह जल्द ही 14 साल की अनिवार्य अवधि पूरी कर लेगा, जिसके बाद उसकी समय से पहले रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए।
कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मामले को गंभीरता से सुना।
पीठ ने कहा,
“अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे तय नीति के तहत कैदी की समय से पहले रिहाई पर स्वयं विचार करें, इसके लिए किसी औपचारिक आवेदन की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं है।”
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि पहले ही सुओ मोटो रिट याचिका (क्रिमिनल) नंबर 4/2021 में इस विषय पर स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं।
Read also:- ₹5 करोड़ के टेलीकॉम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, ग्रे रूटिंग केस में अग्रिम जमानत
अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि-
- जैसे ही याचिकाकर्ता तय अवधि पूरी करे,
- उसकी प्रीमॅच्योर रिलीज की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए,
- और दो महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।
इसके साथ ही अदालत ने जेल अधीक्षक को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए और विशेष अनुमति याचिका को निस्तारित कर दिया।
Case Title: Buttan Sao vs State of Bihar
Case No.: SLP (Criminal) Diary No. 63229/2025
Decision Date: 19 January 2026










