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सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामले में क्यूरेटिव याचिकाएं खारिज कीं, अंतिम फैसले में हस्तक्षेप से इनकार

एस.टी. कृष्ण गौड़ा और अन्य बनाम विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण विवाद में क्यूरेटिव याचिकाएं खारिज कीं, कहा कि रूपा अशोक हुर्रा सिद्धांतों के तहत कोई मामला नहीं बनता है।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामले में क्यूरेटिव याचिकाएं खारिज कीं, अंतिम फैसले में हस्तक्षेप से इनकार

नई दिल्ली में बैठे Supreme Court of India ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक पुराने विवाद में दायर क्यूरेटिव याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि इन याचिकाओं में ऐसा कोई असाधारण कारण नहीं है, जिससे पहले दिए गए अंतिम फैसले पर दोबारा विचार किया जा सके।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एस.टी. कृष्णे गौड़ा एवं अन्य बनाम विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने पहले सिविल अपील और फिर समीक्षा याचिका दायर की थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था। इसके बाद अंतिम विकल्प के तौर पर क्यूरेटिव याचिकाएं दाखिल की गईं।

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रिकॉर्ड के अनुसार, ये क्यूरेटिव याचिकाएं कुछ तकनीकी कमियों (डिफेक्ट्स) के साथ दाखिल की गई थीं। अदालत की रजिस्ट्री ने इन कमियों की सूचना याचिकाकर्ताओं के वकील को दी थी, लेकिन तय समय में उन्हें दूर नहीं किया गया।

अदालत की सुनवाई और अवलोकन

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने याचिकाओं को ‘सर्कुलेशन’ के माध्यम से देखा। तकनीकी खामियों के बावजूद पीठ ने याचिकाओं को केवल गैर-प्रसारण के आधार पर खारिज करने के बजाय, उनके गुण-दोष (merits) पर विचार किया।

पीठ ने कहा कि क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करने के लिए जो सख्त मानक तय हैं, वे इस मामले में पूरे नहीं होते। अदालत ने 2002 के ऐतिहासिक फैसले Rupa Ashok Hurra v. Ashok Hurra का हवाला देते हुए दोहराया कि क्यूरेटिव याचिका तभी सुनी जाती है, जब न्याय के घोर उल्लंघन का स्पष्ट मामला सामने आए।

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पीठ की टिप्पणी थी,

“हमारी राय में, इन क्यूरेटिव याचिकाओं को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।”

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सभी क्यूरेटिव याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे जुड़े सभी लंबित आवेदन भी स्वतः समाप्त माने जाएंगे।

यह आदेश 2 दिसंबर 2025 को पारित किया गया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति पामिडिघंटम श्री नरसिम्हा के हस्ताक्षर हैं।

Case Title: S.T. Krishne Gowda & Anr. vs Special Land Acquisition Officer & Anr.

Case No.: Curative Petition (C) Diary No. 12823/2025 (with connected matters)

Case Type: Curative Petition (Civil)

Decision Date: 02 December 2025

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