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बॉम्बे हाईकोर्ट ने IMAX के विदेशी मध्यस्थता अवॉर्ड को दी नई जीवनरेखा, सीमा अवधि और सार्वजनिक नीति पर एकल पीठ का आदेश पलटा

IMAX Corporation vs E-City Entertainment (India) Pvt. Ltd. & Ors. - बॉम्बे हाई कोर्ट ने आईमैक्स की अपील को स्वीकार करते हुए ई-सिटी के खिलाफ आईसीसी के विदेशी मध्यस्थता पुरस्कारों को लागू करने से इनकार करने के फैसले को पलट दिया और समय सीमा और सार्वजनिक नीति संबंधी आपत्तियों को खारिज कर दिया।

Shivam Y.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने IMAX के विदेशी मध्यस्थता अवॉर्ड को दी नई जीवनरेखा, सीमा अवधि और सार्वजनिक नीति पर एकल पीठ का आदेश पलटा

करीब दो दशकों से अधिक समय से चल रहे एक व्यावसायिक विवाद में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने IMAX Corporation के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें E-City Entertainment (India) Pvt Ltd के खिलाफ पारित तीन विदेशी मध्यस्थता अवॉर्ड को मान्यता और प्रवर्तन देने से इनकार किया गया था।

डिवीजन बेंच ने कहा कि सीमा अवधि (limitation) से जुड़ा निष्कर्ष पहले ही अंतिम रूप ले चुका था और उसे दोबारा नहीं खोला जा सकता। साथ ही, सार्वजनिक नीति के आधार पर अवॉर्ड लागू न करने का निर्णय भी कानूनन टिकाऊ नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सितंबर 2000 का है, जब IMAX ने भारत में छह IMAX थिएटर सिस्टम को 20 वर्षों के लिए लीज पर देने को लेकर E-City के साथ एक मास्टर एग्रीमेंट किया था, जिसमें आगे 10 साल का विस्तार विकल्प भी था। कुछ ही वर्षों में मतभेद उभर आए और IMAX ने लंदन स्थित इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के समक्ष मध्यस्थता शुरू की।

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2006 से 2008 के बीच, ICC मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने तीन अवॉर्ड पारित किए दायित्व, क्षतिपूर्ति (क्वांटम) और अंतिम लागत से जुड़े जिनमें E-City को अनुबंध के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया और IMAX को 1.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि, साथ ही ब्याज देने का निर्देश दिया गया। बाद में IMAX ने आरोप लगाया कि E-City ने अवॉर्ड के प्रवर्तन से बचने के लिए मध्यस्थता के दौरान अपनी संपत्तियों को डिमर्जर के जरिए अलग कर दिया।

भारतीय अदालतों में मुकदमे की यात्रा

E-City ने शुरुआत में विदेशी अवॉर्ड को चुनौती देने के लिए मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत भारत में याचिका दायर की थी। यह चुनौती अंततः सुप्रीम कोर्ट तक गई, जहां यह स्पष्ट किया गया कि विदेशी अवॉर्ड को केवल अधिनियम के भाग-II के तहत ही परखा जा सकता है।

इसके बाद 2018 में IMAX ने बॉम्बे हाईकोर्ट में विदेशी अवॉर्ड की मान्यता और प्रवर्तन के लिए याचिका दायर की। 2019 में एकल पीठ ने E-City की उस आपत्ति को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिका समय-सीमा से बाहर है। यह निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका और समीक्षा याचिका के खारिज होने के बाद अंतिम हो गया।

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हालांकि, अक्टूबर 2024 में एक अन्य एकल पीठ ने अंतिम सुनवाई के समय उसी मुद्दे को दोबारा उठाते हुए, सीमा अवधि, FEMA के कथित उल्लंघन और सार्वजनिक नीति के आधार पर अवॉर्ड के प्रवर्तन से इनकार कर दिया।

अदालत की टिप्पणियां

जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सीमा अवधि का मुद्दा दोबारा नहीं खोला जा सकता।

बेंच ने कहा, “प्रवर्तन याचिका के समय-सीमा के भीतर होने का निष्कर्ष अंतिम हो चुका था और बाद के चरण में उस पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता।”

सार्वजनिक नीति के सवाल पर अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी विदेशी अवॉर्ड को लागू न करने के आधार बेहद सीमित और सख्त होते हैं। केवल इस आधार पर कि ट्रिब्यूनल ने सबूतों या अनुबंध की व्याख्या कैसे की, अवॉर्ड को लागू करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बेंच ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के बाद के फैसलों से पहले से पक्षकारों के बीच अंतिम हो चुके आदेश स्वतः ही शून्य हो जाते हैं।

अदालत ने कहा, “किसी नज़ीर को पलटने और पक्षकारों के बीच दिए गए निर्णय को पलटने में स्पष्ट अंतर होता है।”

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संबंधित कंपनियों का मुद्दा

IMAX ने केवल E-City ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी और होल्डिंग कंपनियों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग की थी, यह कहते हुए कि अवॉर्ड से बचने के लिए संपत्तियों को जानबूझकर स्थानांतरित किया गया। एकल पीठ ने इन कंपनियों को कार्यवाही से बाहर कर दिया था। हालांकि, डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे आरोपों की प्रवर्तन चरण में सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है, खासकर जब संपत्ति के कथित दुरुपयोग का सवाल उठे।

फैसला

IMAX की कमर्शियल आर्बिट्रेशन अपील को स्वीकार करते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 24 अक्टूबर 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विदेशी अवॉर्ड के प्रवर्तन से इनकार किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका समय-सीमा के भीतर थी, सार्वजनिक नीति के आधार गलत तरीके से लागू किए गए थे, और इन कारणों से अवॉर्ड को खारिज नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के साथ, ICC द्वारा पारित विदेशी अवॉर्ड को भारत में मान्यता और प्रवर्तन का रास्ता साफ हो गया है, जिससे IMAX को E-City के खिलाफ लंबे समय से लंबित दावों को अमल में लाने की दिशा में बड़ी राहत मिली है।

Case Title:- IMAX Corporation vs E-City Entertainment (India) Pvt. Ltd. & Ors.

Case Number: Commercial Arbitration Appeal (L) No. 38267 of 2024

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