मुंबई स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश में अफ़कॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा अदालत में जमा कराई गई ₹12.76 करोड़ की राशि चार सप्ताह के भीतर वापस करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनी के खिलाफ पारित मध्यस्थता पुरस्कार (Arbitral Award) अब दिवाला समाधान योजना के चलते प्रभावहीन हो चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2015 के एक मध्यस्थता पुरस्कार से जुड़ा है, जिसमें रिलायंस नेवल (तत्कालीन पिपावाव डिफेंस) को अफ़कॉन्स को लगभग ₹49.11 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। इस पुरस्कार को चुनौती देते हुए रिलायंस ने बॉम्बे हाईकोर्ट में धारा 34 के तहत याचिका दायर की थी।
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सुनवाई के दौरान, 20 फरवरी 2017 को हाईकोर्ट के आदेश पर रिलायंस ने ₹12.76 करोड़ की राशि अदालत में जमा कराई। बाद में अफ़कॉन्स को यह रकम बैंक गारंटी के बदले निकालने की अनुमति दी गई।
इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया। रिलायंस नेवल को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (IBC) के तहत दिवाला प्रक्रिया में भेजा गया। 23 दिसंबर 2022 को कंपनी की समाधान योजना मंजूर हुई, जिसमें अफ़कॉन्स के दावे को ₹49.11 करोड़ से घटाकर केवल ₹1 कर दिया गया।
मुख्य सवाल यह था कि जब समाधान योजना के तहत अफ़कॉन्स का दावा लगभग समाप्त हो चुका है, तो क्या वह अदालत से निकाली गई ₹12.76 करोड़ की राशि अपने पास रख सकता है?
रिलायंस ने दलील दी कि अब मध्यस्थता पुरस्कार अस्तित्व में नहीं है, इसलिए यह राशि वापस मिलनी चाहिए। साथ ही कंपनी ने 18% वार्षिक ब्याज की भी मांग की।
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कोर्ट की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरसन ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा,
“जब समाधान योजना के तहत मूल दावा ही समाप्त हो गया है, तो उस आधार पर निकाली गई राशि को अपने पास रखने का कोई औचित्य नहीं बचता।”
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के घनश्याम मिश्रा फैसले और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि दिवाला समाधान के बाद पुराने दावे स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
कोर्ट ने यह भी माना कि अदालत में जमा की गई राशि custodia legis यानी अदालत की निगरानी में थी, और केवल अस्थायी रूप से बैंक गारंटी के आधार पर अफ़कॉन्स को दी गई थी।
रिलायंस द्वारा 18% ब्याज की मांग पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। न्यायालय ने कहा कि यह मांग अलग कारण (separate cause of action) से जुड़ी है और इसे इस अंतरिम आवेदन के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने साफ किया कि यदि रिलायंस ब्याज का दावा करना चाहता है, तो उसे इसके लिए अलग कानूनी कार्यवाही करनी होगी।
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अंतिम निर्णय
कोर्ट ने आदेश दिया कि:
- अफ़कॉन्स चार सप्ताह के भीतर ₹12.76 करोड़ की राशि हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा करेगा।
- तय समय में राशि न लौटाने पर रजिस्ट्री बैंक गारंटी भुनाने के लिए स्वतंत्र होगी।
- ब्याज की मांग अस्वीकार की जाती है।
- मामले में किसी भी पक्ष पर लागत (cost) नहीं लगाई गई।
इसी के साथ अंतरिम आवेदन का निपटारा कर दिया गया।
Case Title: Reliance Naval & Engineering Ltd. vs Afcons Infrastructure Ltd.
Case No.: Arbitration Petition No. 1755 of 2015
Case Type: Arbitration / Insolvency
Decision Date: 17 December 2025










