अहमदाबाद स्थित High Court of Gujarat में शुक्रवार को एक विशेष सिविल आवेदन की सुनवाई बेहद संक्षिप्त लेकिन अहम मोड़ पर खत्म हो गई। मामला ऐसा था, जिसमें याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति सुनवाई से पहले ही दूर हो चुकी थी। नतीजा यह हुआ कि अदालत ने याचिका को निरर्थक घोषित करते हुए निस्तारित कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका यासिनभाई अल्लारखा बलोच और एक अन्य की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि किसी सामग्री या प्रसारण में प्रयुक्त एक विशेष शब्द आपत्तिजनक है और उससे उन्हें गंभीर आपत्ति है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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मामले को विशेष सिविल आवेदन संख्या 17681/2025 के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 4 से 6 की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलील ठाकोर ने अदालत को बताया कि जिस शब्द पर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी, उसे पहले ही म्यूट कर दिया गया है।
अदालत में यह स्पष्ट बयान दिया गया कि अब उस आपत्तिजनक शब्द का कोई अस्तित्व नहीं है। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ता मेघा जानी ने भी इस तथ्य पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
न्यायालय ने रिकॉर्ड पर इस सहमति को दर्ज करते हुए माना कि अब विवाद का कोई कारण शेष नहीं बचता।
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अदालत का फैसला
मामले की स्थिति को देखते हुए माननीय न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी. मयी ने स्पष्ट रूप से कहा कि-
“अब जबकि जिस शब्द को लेकर आपत्ति थी, वह पहले ही म्यूट किया जा चुका है, ऐसे में वर्तमान याचिका में कोई विवाद शेष नहीं रहता।”
इसी आधार पर अदालत ने याचिका को निरर्थक (Infructuous) मानते हुए उसका निस्तारण कर दिया। साथ ही, प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता को वकालतनामा दाखिल करने की अनुमति भी दी गई।
याचिका को बिना किसी आगे की सुनवाई के समाप्त कर दिया गया।
Case Title: Yasinbhai Allarakha Baloch & Anr. vs Union of India & Ors.
Case No.: Special Civil Application No. 17681 of 2025
Case Type: Writ Petition (Civil)
Decision Date: 09 January 2026










