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हिमाचल हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मौत के दोषी चालक की सजा बरकरार रखी, पुनरीक्षण याचिका खारिज

परम जीत सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में दोषी चालक की सजा बरकरार रखते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज की।

Vivek G.
हिमाचल हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मौत के दोषी चालक की सजा बरकरार रखी, पुनरीक्षण याचिका खारिज

शिमला में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पुराने सड़क हादसे से जुड़े आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए वाहन चालक को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालतों के एक जैसे निष्कर्षों में कोई कानूनी खामी नहीं है, जिस पर पुनरीक्षण के स्तर पर हस्तक्षेप किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 22 मई 2006 का है। चंबा जिले के बनिखेत क्षेत्र में कुछ लोग अपने मवेशियों के साथ सड़क किनारे चल रहे थे। उसी दौरान तेज़ रफ्तार में आई एक स्कॉर्पियो गाड़ी ने एक युवक सादिक अली को टक्कर मार दी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण युवक की मौत हो गई।

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पुलिस ने चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाह ड्राइविंग), 304-ए (लापरवाही से मौत) और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जिसे बाद में सत्र अदालत ने भी बरकरार रखा।

हाईकोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं

दोषी चालक ने हाईकोर्ट में दायर पुनरीक्षण याचिका में कहा कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। बचाव पक्ष का तर्क था कि कुछ गवाहों ने वाहन की पहचान को लेकर संदेह जताया और आरोपी को झूठा फंसाया गया।

वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर शुरू से रिकॉर्ड में है, दुर्घटना के तुरंत बाद उसी गाड़ी को बैरियर पर रोका गया और उसके आगे का शीशा टूटा हुआ मिला। यह सब परिस्थितिजन्य सबूत चालक की लापरवाही की ओर साफ इशारा करते हैं।

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अदालत की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की पीठ ने कहा कि पुनरीक्षण अदालत का दायरा सीमित होता है। अदालत ने टिप्पणी की,

“जब ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत दोनों ने सबूतों की विस्तार से जांच कर एक जैसा निष्कर्ष निकाला हो, तो हाईकोर्ट को तथ्यों का दोबारा मूल्यांकन नहीं करना चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा कि सड़क पर मवेशी और लोग मौजूद हों, ऐसी स्थिति में चालक से अतिरिक्त सावधानी की अपेक्षा होती है। तेज़ रफ्तार और गलत साइड में वाहन चलाना स्पष्ट रूप से लापरवाही है।

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अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालतों के फैसलों में कोई कानूनी त्रुटि या गंभीर अन्याय नहीं है। इसलिए दोषी चालक की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई और एक साल की सजा सहित अन्य दंड को बरकरार रखा गया।

Case Title: Param Jeet Singh vs State of Himachal Pradesh

Case No.: Criminal Revision No. 178 of 2014

Decision Date: 21 November 2025

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