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‘ब्लैकलिस्टिंग कोई औपचारिकता नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने कहा– बिना स्पष्ट कारण बताओ नोटिस ठेकेदार को दंडित करना गलत

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द किया, लेकिन ठेका समाप्त करने के फैसले को सही ठहराया। - M/s ए.के.जी. कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम झारखंड राज्य और अन्य।

Vivek G.
‘ब्लैकलिस्टिंग कोई औपचारिकता नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने कहा– बिना स्पष्ट कारण बताओ नोटिस ठेकेदार को दंडित करना गलत

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी ठेकों में कार्रवाई करते समय “कानूनी संतुलन” बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने एक ओर ठेके की समाप्ति को सही ठहराया, वहीं ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के फैसले को खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला M/s A.K.G. कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड. बनाम राज्य झारखंड से जुड़ा है। कंपनी को झारखंड के जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा 6 मार्च 2023 को एक जल टंकी (Elevated Service Reservoir) बनाने का ठेका दिया गया था।

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1 जून 2024 को निर्माणाधीन टंकी का ऊपरी हिस्सा गिर गया। कंपनी ने इसे प्राकृतिक आपदा (चक्रवात) का परिणाम बताया और अपने खर्च पर दोबारा निर्माण की पेशकश की।

हालांकि, विभाग ने 4 जून 2024 को नोटिस जारी कर निर्माण में लापरवाही और घटिया गुणवत्ता के आरोप लगाए।

इसके बाद कई तकनीकी जांचें हुईं, जिनमें विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट शामिल थीं। इन रिपोर्टों में ठेकेदार की लापरवाही पाई गई। 23 अगस्त 2024 को विभाग ने ठेका समाप्त करते हुए कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया।

कंपनी ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन झारखंड हाई कोर्ट ने 7 फरवरी 2025 को याचिका खारिज कर दी और 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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रीव्यू याचिका भी खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान बेंच न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे ने स्पष्ट किया कि ठेका समाप्त करना और ब्लैकलिस्ट करना दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

अदालत ने कह,

“ब्लैकलिस्टिंग एक गंभीर और दंडात्मक कार्रवाई है, इसे बिना स्पष्ट कारण और उचित प्रक्रिया के लागू नहीं किया जा सकता।”

बेंच ने यह भी जोड़ा कि

“ऐसी कार्रवाई से पहले ठेकेदार को स्पष्ट नोटिस देना और उसका पक्ष सुनना आवश्यक है, क्योंकि इसका असर भविष्य के कामों पर पड़ता है।”

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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:

  • ठेका समाप्त करने का निर्णय पर्याप्त जांच और साक्ष्यों पर आधारित था
  • ठेकेदार को इस संबंध में पर्याप्त अवसर भी दिया गया था
  • लेकिन ब्लैकलिस्टिंग के लिए अलग और स्पष्ट नोटिस नहीं दिया गया

अदालत ने कहा कि 4 जून 2024 का नोटिस ब्लैकलिस्टिंग के लिए पर्याप्त नहीं था, क्योंकि उसमें इस कठोर कार्रवाई का स्पष्ट संकेत नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा:

  • ठेका समाप्त करने का आदेश बरकरार रहेगा
  • लेकिन ब्लैकलिस्टिंग का आदेश रद्द किया जाता है

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि ब्लैकलिस्टिंग की अवधि अब निर्णय की तारीख से समाप्त मानी जाएगी और आगे लागू नहीं रहेगी।

Case Title: M/s A.K.G. Construction and Developers Pvt. Ltd. vs State of Jharkhand & Ors.

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