5 जनवरी का फैसला : दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लंबी हिरासत के बावजूद जमानत से इनकार
Supreme Court of India सोमवार, 5 जनवरी को दिल्ली दंगों से जुड़े ‘बड़ी साजिश’ मामले में ज़मानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने जा रहा है। पूर्व जेएनयू छात्र नेता Umar Khalid समेत कई आरोपियों की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत का यह निर्णय लंबे समय से प्रतीक्षित है। सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में मौजूद अधिवक्ताओं की दलीलों और सरकारी पक्ष के जवाबों पर सभी की निगाहें टिकी रहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला फरवरी 2020 में राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की बात सामने आई थी। दिल्ली पुलिस ने इन घटनाओं को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी के विरोध के दौरान रची गई एक “बड़ी साजिश” बताया। आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गंभीर आरोप लगाए गए।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को इन सभी आरोपियों को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि “बिना नियंत्रण का विरोध संवैधानिक ढांचे और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।”
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति अरविंद कुमार कर रहे थे, ने दिसंबर में सभी विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोपियों की ओर से मुख्य तर्क यह रखा गया कि वे पिछले पांच से छह वर्षों से बिना ट्रायल के जेल में हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा,
“प्रदर्शन करना अपराध नहीं है। किसी छात्र को सिर्फ विरोध करने के लिए वर्षों तक जेल में रखना न्याय नहीं हो सकता।”
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वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंहवी ने एक महिला आरोपी के मामले में लंबी हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक जेल में रखने से कोई सार्वजनिक हित पूरा नहीं होता।
दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह कोई स्वतःस्फूर्त विरोध नहीं था, बल्कि देशव्यापी स्तर पर सोची-समझी साजिश थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा,
“फरवरी 2020 की हिंसा देश की संप्रभुता पर हमला थी।”
पुलिस की ओर से वीडियो क्लिप और डिजिटल सबूत भी अदालत में दिखाए गए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि यदि आरोपी सहयोग करें तो ट्रायल दो साल में पूरा किया जा सकता है और देरी के लिए खुद आरोपी जिम्मेदार हैं।
आरोपियों के वकीलों ने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट में दर्जनों मामलों में बरी किए जाने के फैसले आ चुके हैं, जिससे जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि भाषणों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और केवल भाषण के आधार पर ‘आतंकी कृत्य’ नहीं माना जा सकता।
अदालत का निर्णय
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह 5 जनवरी को इन सभी याचिकाओं पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी।
Case Title: Umar Khalid v. State of NCT of Delhi & Ors.
Case No.: SLP (Crl.) No. 14165/2025 (with connected matters)
Case Type: Bail – Criminal
Decision Date: January 5, 2026










