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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने Lt. Col. डलजीत सिंह डोगरा की भूमि रद्द करने का सरकारी आदेश रद्द किया

लेफ्टिनेंट कर्नल दलजीत सिंह डोगरा बनाम जम्मू और कश्मीर राज्य और अन्य, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने Lt. Col. डलजीत सिंह डोगरा को दी गई भूमि का आवंटन रद्द करने वाला सरकारी आदेश खारिज किया।

Vivek G.
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने Lt. Col. डलजीत सिंह डोगरा की भूमि रद्द करने का सरकारी आदेश रद्द किया

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत Lt. Col. डलजीत सिंह डोगरा को दी गई एक कनाल जमीन का आवंटन रद्द किया गया था। अदालत ने साफ कहा कि यह कार्रवाई न केवल बिना सुनवाई के की गई, बल्कि पहले से लागू न्यायिक आदेशों की भी अवहेलना थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला लगभग सात दशकों पुराने भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के पिता मेजर अंचल सिंह की 6 कनाल 1 मरला भूमि महाराजा हरि सिंह के आदेश पर रामनगर पैलेस परिसर में शामिल कर ली गई थी, लेकिन इसके बदले न तो जमीन दी गई और न ही मुआवजा।

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लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, वर्ष 1999 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता को वैकल्पिक भूमि दी जाए या फिर उचित मुआवजा दिया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में 2016 में सरकार ने डोगरा को विभिन्न स्थानों पर कुल 6 कनाल 1 मरला भूमि आवंटित की, जिसमें रक्ख बहू (जम्मू) स्थित एक कनाल भूमि भी शामिल थी।

फरवरी 2018 में, सरकार ने अचानक एक आदेश जारी कर रक्ख बहू की एक कनाल भूमि का आवंटन रद्द कर दिया। तर्क दिया गया कि:

  • आवंटित भूमि की कीमत मूल अधिग्रहित भूमि से अधिक है
  • भूमि का उपयोग “पुनर्वास” के उद्देश्य के विपरीत किया गया

इस आदेश से न केवल Lt. Col. डोगरा प्रभावित हुए, बल्कि वे लोग भी प्रभावित हुए जिन्होंने यह भूमि उनसे खरीद ली थी।

न्यायमूर्ति मोक्षा खजूरिया काज़मी ने सुनवाई के दौरान सरकारी तर्कों को कमजोर बताते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा:

“आवंटन रद्द करने का आदेश न तो किसी वैधानिक प्रावधान पर आधारित है और न ही इसमें कोई ठोस कारण दर्ज है।”

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अदालत ने यह भी नोट किया कि:

  • भूमि का कब्जा पहले ही याचिकाकर्ता को सौंपा जा चुका था
  • आवंटन रद्द करने से पहले कोई सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया
  • स्वयं महाधिवक्ता की कानूनी राय में इस आदेश को गलत बताया गया था

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी निर्माण को अवैध माना जाता है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध है, लेकिन केवल इस आधार पर भूमि आवंटन रद्द नहीं किया जा सकता।

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अंतिम निर्णय

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने:

  • Government Order No. 50-HUD of 2018 दिनांक 16.02.2018 को रद्द कर दिया
  • याचिकाकर्ता और भूमि खरीदने वालों के पक्ष में सभी रिट याचिकाएँ स्वीकार कीं
  • संबंधित अवमानना याचिका को भी निस्तारित कर दिया

अदालत ने कहा कि यह मामला दशकों से लंबित है और प्रशासनिक मनमर्जी से इसे और लंबा नहीं खींचा जा सकता।

Case Title: Lt. Col. Daljit Singh Dogra vs State of J&K & Others

Case No.: OWP No. 518/2018 with connected matters

Case Type: Writ Petition (Land Allotment Dispute)

Decision Date: 29 December 2025

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