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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लीगल एड डिफेंस काउंसल की SOP रद्द की, संविदा अवधि बढ़ाने का रास्ता साफ

रामकृष्ण सोनी और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य - मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एसएलएसए एसओपी को रद्द करते हुए फैसला सुनाया कि कानूनी सहायता बचाव पक्ष के वकीलों को एनएएलएसए की 2022 योजना के विपरीत नए सिरे से चयन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

Shivam Y.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लीगल एड डिफेंस काउंसल की SOP रद्द की, संविदा अवधि बढ़ाने का रास्ता साफ

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) द्वारा जारी नई चयन प्रक्रिया (SOP) को रद्द कर दिया है। यह SOP लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम, संशोधित योजना 2022 के तहत नियुक्त वकीलों के लिए लाई गई थी। अदालत ने साफ कहा कि राज्य प्राधिकरण, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NLSA) की योजना से हटकर कोई नई प्रक्रिया लागू नहीं कर सकता।

यह फैसला 18 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल धगट और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने सुनाया ।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता रामकृष्ण सोनी सहित अन्य वकील विभिन्न जिलों में लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम के तहत संविदा पर कार्यरत थे। इनकी नियुक्ति संशोधित योजना 2022 के अनुसार हुई थी, जिसमें दो साल की संविदा अवधि और संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर आगे विस्तार का प्रावधान है।

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अगस्त 2025 में SLSA ने एक नई SOP जारी की। इसके अनुसार, मौजूदा लीगल एड डिफेंस काउंसल को दो साल बाद स्वतः विस्तार नहीं मिलेगा और उन्हें फिर से चयन प्रक्रिया में भाग लेना होगा। इसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि NLSA की संशोधित योजना 2022 एक बाध्यकारी नीति है, न कि केवल सुझाव।

उनका कहना था,

उन्होंने विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 7 और 8 पर भरोसा किया, जो राज्य प्राधिकरणों को केंद्रीय प्राधिकरण की नीतियों और निर्देशों के अनुसार कार्य करने का आदेश देती है।

यह भी कहा गया कि कई जिलों में जिला न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ताओं के कार्य को संतोषजनक बताया है, ऐसे में नई SOP लागू करना अनुचित है।

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राज्य प्राधिकरण का पक्ष

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दलील दी गई कि नई SOP बेहतर प्रतिभा चुनने और कानूनी सहायता की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लाई गई है। प्राधिकरण ने कहा कि मौजूदा वकीलों को भी नई चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे, जिससे उन्हें नुकसान नहीं होगा।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

खंडपीठ ने कानूनी प्रावधानों और संशोधित योजना 2022 का गहन अध्ययन किया। अदालत ने कहा कि योजना के चयन और संविदा विस्तार से जुड़े प्रावधान “सुझाव मात्र” नहीं हैं।

पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“संशोधित योजना 2022 राज्य प्राधिकरण को यह अधिकार नहीं देती कि वह दो साल बाद अनिवार्य रूप से नई चयन प्रक्रिया लागू करे।”

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अदालत ने यह भी कहा कि एक बार संविदा की शर्तें तय हो जाने के बाद राज्य प्राधिकरण उन्हें एकतरफा बदल नहीं सकता।

अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को जारी SOP को रद्द कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि संशोधित योजना 2022 के तहत नियुक्त सभी लीगल एड डिफेंस काउंसल अपने पद पर संविदा आधार पर कार्य जारी रखेंगे।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी वकील का प्रदर्शन असंतोषजनक पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण योजना के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

इसी के साथ याचिका स्वीकार कर ली गई और मामले का निस्तारण कर दिया गया।

Case Title:- Ramkrishna Soni & Others vs Union of India & Others

Case Number: Writ Petition No. 36687 of 2025

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