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मद्रास हाईकोर्ट में TASMAC मुख्यालय पर ED की तलाशी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित, 23 अप्रैल को सुनाया जाएगा आदेश

मद्रास हाईकोर्ट ने TASMAC मुख्यालय पर ED की तलाशी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है। आदेश 23 अप्रैल को सुनाया जाएगा।

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मद्रास हाईकोर्ट में TASMAC मुख्यालय पर ED की तलाशी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित, 23 अप्रैल को सुनाया जाएगा आदेश

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु राज्य सरकार और तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) द्वारा दायर उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा TASMAC मुख्यालय पर 6 और 8 मार्च को की गई तलाशी को चुनौती दी गई है।

यह मामला न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति के राजशेखर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान ही यह संकेत दिया था कि आदेश सुरक्षित रखा जाएगा, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, जो TASMAC की ओर से पेश हुए, को आज विशेष रूप से पुनः सुनवाई का अवसर दिया गया। सिंह की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आदेश 23 अप्रैल को सुनाया जाएगा।

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बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी मामले में जांच की शुरुआत के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज होना अनिवार्य है। उन्होंने दलील दी कि इस केस में FIR दर्ज किए बिना ही ED ने सीधे तलाशी की कार्रवाई शुरू कर दी, जो कानून के दायरे से बाहर है। सिंह ने कहा कि राज्य में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनज़र ED ने पहले से ही मन बना लिया था कि वह तमिलनाडु के उत्पाद शुल्क विभाग की जांच करेगी और इसीलिए तलाशी की कार्रवाई की गई।

"FIR ही किसी भी जांच की शुरुआत होती है। ED की किसी भी मामले में कार्रवाई की वैधता FIR पर निर्भर करती है। इस केस में, ED ने अपने कार्यालय में बैठकर तय कर लिया कि उसे तमिलनाडु जाकर उत्पाद शुल्क विभाग की जांच करनी है। इसके लिए वे अधिकारीयों के खिलाफ सबूत तलाशना चाहते हैं। यह एक अनोखा मामला है, जहाँ ED ने पहले से ही तय कर लिया कि उसे उत्पाद शुल्क विभाग की जांच करनी है और फिर जांच शुरू की। आम तौर पर प्रक्रिया इसका उल्टा होती है," सिंह ने दलील दी।

सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि ED ने अपनी लिखित दलीलों में यह झूठा दावा किया कि TASMAC मुख्यालय से नकद जब्त किया गया है, जबकि न तो उनके जवाबी हलफनामे में और न ही प्रेस विज्ञप्ति में ऐसी कोई बात कही गई थी। उन्होंने इसे TASMAC के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा करने की कोशिश बताया।

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इसके अलावा सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के ‘विजय मदनलाल चौधरी’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस फैसले में ED को बिना FIR के केवल संलग्नी (attachment) संबंधी कार्रवाई की अनुमति दी गई थी, तलाशी और जब्ती के लिए नहीं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि तलाशी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले FIR का दर्ज होना आवश्यक है। यदि FIR दर्ज नहीं की गई है तो पूरी कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर मानी जाएगी और वह स्वतः अमान्य हो जाएगी।

"अपने जवाब में ED कहती है कि धारा 157 का पालन किया गया है। लेकिन FIR कहाँ है? कौन सी FIR कहती है कि TASMAC में कोई गड़बड़ी है जिसकी जांच होनी चाहिए। अगर FIR नहीं है, तो पूरी कार्रवाई अधिकार क्षेत्र के बाहर होगी और सब कुछ असफल हो जाएगा," सिंह ने कोर्ट में कहा।

कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अब 23 अप्रैल को आदेश सुनाए जाने की संभावना है।

मामले का शीर्षक: तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (TASMAC) बनाम प्रवर्तन निदेशालय
मामला संख्या: डब्ल्यूपी 10348/2025

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