इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अहम आदेश में संत कबीर नगर के दो युवकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। मामला उस समय का है जब स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक स्थान पर नमाज़ अदा करने पर अस्थायी रोक लगाई थी। अदालत ने कहा कि भविष्य और परिस्थितियों को देखते हुए दोनों आवेदकों के खिलाफ मुकदमा जारी रखना उचित नहीं है।
मामला क्या था?
यह मामला केस क्राइम संख्या 1055 वर्ष 2017 से जुड़ा है, जिसमें धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना)आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि प्रशासन द्वारा रोके जाने के बावजूद कुछ लोगों ने उसी स्थान पर नमाज़ अदा की।
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दोनों आवेदकों - अज़ीम अहमद खान उर्फ अबीम अहमद और एक अन्य - के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ और 27 मई 2019 को समन जारी कर उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया गया।
पक्षकारों की दलीलें
सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों युवक छात्र हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा, “सिर्फ नमाज़ अदा करने की मंशा के आधार पर इन युवकों को अभियुक्त बना देना उनके भविष्य के साथ अन्याय होगा।”
दूसरी ओर, राज्य की ओर से उपस्थित एजीए ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ स्थानों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया था। इसके बावजूद आवेदकों ने निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।
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अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने साफ कहा कि अदालत केवल इन दो आवेदकों के संबंध में विचार कर रही है, अन्य सह-आरोपियों के बारे में नहीं।
अदालत ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है, जहां हर नागरिक को अपने धर्म और आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता है।” साथ ही यह भी जोड़ा कि “समाज की शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना भी हर नागरिक का कर्तव्य है।”
न्यायालय ने यह भी माना कि दोनों आवेदकों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे छात्र हैं। ऐसे में लंबा आपराधिक मुकदमा उनके भविष्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
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अंतिम निर्णय
अदालत ने केस संख्या 2828 वर्ष 2019 की पूरी कार्यवाही - जिसमें 29 अगस्त 2017 का आरोपपत्र और 27 मई 2019 का समन आदेश शामिल था - केवल इन दोनों आवेदकों के संबंध में रद्द कर दी।
हालांकि, अदालत ने उन्हें चेतावनी भी दी। आदेश में कहा गया कि भविष्य में यदि प्रशासन द्वारा किसी स्थान पर कानून-व्यवस्था के हित में कोई प्रतिबंध लगाया जाए, तो उसका पालन करना अनिवार्य होगा।
इसी के साथ धारा 528 बीएनएसएस के तहत दाखिल याचिका स्वीकार कर ली गई और कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
Case Title: Azeem Ahmad Khan @ Abeem Ahmad & Another vs State of U.P. & Another
Case No.: Application U/S 528 BNSS No. 46108 of 2025
Decision Date: February 17, 2026









