नई दिल्ली में आज 5 जनवरी को Supreme Court of India ने राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए दिव्यांग (PwD) अधिवक्ताओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने उनके लिए नामांकन शुल्क को 1.25 लाख रुपये से घटाकर मात्र 15,000 रुपये कर दिया। साथ ही, Bar Council of India को भविष्य के चुनावों के लिए नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका राज्य बार काउंसिल चुनावों में दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए प्रतिनिधित्व और भारी नामांकन शुल्क को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ऊंचा शुल्क उनके लिए चुनाव लड़ना लगभग असंभव बना देता है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi की पीठ ने की।
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सुनवाई के दौरान दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Indira Jaising ने अदालत को बताया कि दिव्यांग वकीलों के लिए 1.2 लाख रुपये का शुल्क एक बड़ी बाधा है।
उन्होंने कहा,
“हमने न केवल आरक्षण की मांग की है, बल्कि इस अत्यधिक शुल्क को हटाने की भी प्रार्थना की है।”
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष Manan Kumar Mishra ने अदालत को बताया कि इस वर्ष चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए मुख्य परिषद में आरक्षण देना व्यावहारिक रूप से कठिन है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि दिव्यांग अधिवक्ताओं को विभिन्न समितियों में शामिल किया जाएगा।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने शुल्क में कमी की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा,
“क्या यह स्वीकार्य होगा यदि शुल्क 1.25 लाख से घटाकर 25,000 रुपये कर दिया जाए?”
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इस पर इंदिरा जयसिंह ने जवाब दिया,
“25,000 रुपये भी नए वकीलों के लिए ज्यादा हैं। उन्हें पहले कमाने का मौका मिलना चाहिए।”
इसके बाद बीसीआई अध्यक्ष ने शुल्क को 15,000 रुपये तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अदालत ने दो अहम मुद्दों पर आदेश पारित किया।
पहला, चूंकि कई राज्य बार काउंसिलों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, इसलिए मौजूदा चुनावों में आरक्षण लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि, बीसीआई द्वारा दिव्यांग अधिवक्ताओं को समितियों में सह-नियुक्त (co-opt) करने के आश्वासन को दर्ज किया गया।
दूसरा, दिव्यांग श्रेणी के अधिवक्ताओं के लिए नामांकन शुल्क 1.25 लाख रुपये से घटाकर 15,000 रुपये तय किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह रियायत केवल दिव्यांग अधिवक्ताओं तक सीमित रहेगी और अन्य उम्मीदवार इससे समानता का दावा नहीं कर सकेंगे।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाले चुनावों में संवैधानिक ढांचे और कल्याणकारी कानूनों के तहत जिन वर्गों के लिए आरक्षण की परिकल्पना है, उनके लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाए।
Case Title: Pankaj Sinha v. Bar Council of India and Ors.
Case No.: W.P.(C) No. 1261/2025
Case Type: Writ Petition (Civil)
Decision Date: 5 January 2026










